गैंगस्टर एक्ट में कुर्क हुई अफजाल अंसारी की पत्नी की संपत्ति बहाल: 4 साल बाद वापस मिली आलीशान कोठी, अंदर पहुंचने पर उड़े होश

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लखनऊ के अति विशिष्ट और पॉश इलाके डालीबाग में स्थित समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम दर्ज आवासीय भूखंड और आलीशान कोठी का कानूनी कब्जा पाने की प्रक्रिया बुधवार को औपचारिक रूप से पूरी कर ली गई। अदालत के सख्त निर्देशों के तहत गाजीपुर और लखनऊ जिला प्रशासन के आपसी समन्वय से लंबे समय से सीलबंद पड़ी इस संपत्ति को अवमुक्त कर विधिवत कब्जा सौंपने की प्रशासनिक कार्रवाई को तेजी से अंजाम दिया गया। इस दौरान सांसद अफजाल अंसारी खुद अपने पूरे परिवार और प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर मौजूद रहे।

अदालत के निर्देश पर सीलिंग हटाने और विधिवत कब्जा दिलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम मौके पर मौजूद है। अफजाल अंसारी अपने परिजनों के साथ डालीबाग स्थित संपत्ति पर डटे हुए हैं। मौके पर मौजूद अधिकारियों के तरफ से कागजी औपचारिकताओं, सील खोलने के पंचनामे और पैमाइश की प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिसके बाद संपत्ति का वास्तविक दखल अंसारी परिवार को सौंपा जाएगा।

डालीबाग में करीब 6700 स्क्वायर फीट पर बनी कोठी

आपको बताते चलें कि डालीबाग में करीब 6700 स्क्वायर फीट के भूखंड पर बनी यह आलीशान कोठी अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी के नाम दर्ज है। गाजीपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश पर 23-28 अक्टूबर 2022 को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत गाजीपुर पुलिस की टीम ने लखनऊ आकर इसे कुर्क व सील किया था। इसके बाद से इस आवासीय भवन की देखरेख और प्रशासनिक निगरानी का जिम्मा लखनऊ नगर आयुक्त को सौंपा गया था।

मकान गैंगस्टर गतिविधि या अपराध से अर्जित संपत्ति नहीं

इस जब्ती के खिलाफ फरहत अंसारी ने अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ी। गाजीपुर की विशेष गैंगस्टर कोर्ट ने बीते साल 2025 के अप्रैल माह में अपने फैसले में साफ किया था कि डालीबाग स्थित यह आवासीय मकान किसी गैंगस्टर गतिविधि या अपराध से अर्जित संपत्ति नहीं है। अदालत ने गाजीपुर के जिलाधिकारी को 30 दिनों के भीतर मकान की सील खुलवाकर उसे फरहत अंसारी को वापस सौंपने का स्पष्ट आदेश दिया था।

सील हटाकर कब्जा परिवार को सौंपा

समय सीमा में मकान न खुलने पर फरहत अंसारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति सी.डी. सिंह की एकल पीठ के समक्ष अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने पक्ष रखा, जिसके बाद हाईकोर्ट ने डीएम गाजीपुर को पांच सप्ताह में सकारण आदेश पारित करने का निर्देश दिया था। इस न्यायिक सख्ती के बाद गाजीपुर जिला प्रशासन ने लखनऊ नगर आयुक्त और तहसील प्रशासन को पत्र भेजकर सीलिंग हटाने व संपत्ति वापस सौंपने के निर्देश दिए। इसी क्रम में आज तहसीलदार की मौजूदगी में सील हटाकर जमीन और मकान का कब्जा अफजाल अंसारी व उनके परिवार को सौंपा जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि 4 साल पहले गैंगस्टर एक्ट में कुर्क हुई कोठी तो अफ़जाल अंसारी को मिल गई, लेकिन खबर है कि कोठी से अफ़जाल अंसारी की पत्नी का लाखों का जेवर गायब है। सील होने के बाद कोठी नगर आयुक्त की निगरानी में दी गई थी। आज लखनऊ के डालीबाग स्थित कोठी की सील कोर्ट के आदेश पर खोली गई। नगर निगम के अधिकारियों ने सील हटाकर उन्हें चाबियां सौंपी।

हालांकि, कानूनी जंग जीतने और चार साल बाद अपनी संपत्ति वापस मिलने की खुशी उस वक्त गहरी चिंता और विवाद में बदल गई जब परिवार के लोग अंदर दाखिल हुए। सूत्रों के अनुसार, कोठी की सील खुलने के बाद जब अफ़जाल अंसारी और उनके परिजन भीतर गए तो उन्होंने देखा कि अंदर रखी अलमारियों और दराजों के ताले टूटे हुए थे। सांसद अफजाल अंसारी का आरोप है कि इन अलमारियों में उनकी बेटी की शादी के लिए संचित करके रखे गए कीमती जेवर और लाखों रुपए मूल्य का अन्य जरूरी सामान रखा हुआ था। उनका दावा है कि सील के दौरान नगर आयुक्त की प्रशासनिक निगरानी में रहे इस भवन से सोने-चांदी के गहने और सारा कीमती सामान गायब मिला है, जिससे इस पूरी कार्रवाई पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh