आगरा के श्री प्रेमनिधि मंदिर में रक्षाबंधन पर अनोखा उत्सव: सफेद घटा के हिंडोले में विराजे बाल कृष्ण, ठाकुर श्याम बिहारी को धराई गई राखी

RELIGION/ CULTURE

आगरा। नाई की मंडी स्थित श्री प्रेमनिधि जी मंदिर में सावन पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के पावन अवसर पर पुष्टिमार्गीय सेवा-परंपरा के अनुरूप हिंडोला उत्सव मनाया गया। इस अवसर पर ठाकुर श्याम बिहारी जी को सफेद घटा का मनोहारी श्रृंगार धारण कराकर हिंडोले पर विराजित किया गया और रक्षाबंधन के विशेष भाव के अनुरूप उन्हें रक्षा-सूत्र अर्थात राखी धराई गई। बाल स्वरूप ठाकुरजी के प्रति वात्सल्य, ममत्व और उनकी रक्षा की कामना से जुड़ा यह प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष भाव-विभोर करने वाला रहा।

सफेद घटा के मध्य हिंडोले पर विराजमान ठाकुरजी के दिव्य स्वरूप के दर्शन के साथ मंदिर में हरिनाम संकीर्तन एवं पुष्टिमार्गीय पद गायन हुआ। पदों और कीर्तन में यशोदा मैया के वात्सल्य भाव, अपने लाल कन्हैया की बलैया लेने और उन्हें बुरी नजर एवं समस्त बाधाओं से बचाने के प्रसंगों का भावपूर्ण गायन हुआ। दिनेश पचौरी और अमित शर्मा द्वारा किए गए संकीर्तन की मधुर स्वर लहरियों से पूरा मंदिर परिसर कृष्णमय हो उठा।

पुष्टिमार्ग में रक्षाबंधन का भाव भाई-बहन के रिश्ते से अलग

मुख्य सेवायत हरिमोहन गोस्वामी और सुमित गोस्वामी ने बताया कि पुष्टिमार्ग में रक्षाबंधन का भाव सामान्य रूप से प्रचलित भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है। यहां इस उत्सव का मूल भाव ठाकुरजी के बाल स्वरूप के प्रति वात्सल्य और उनकी रक्षा की मंगलकामना से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के दिन वैष्णव माँ यशोदा के भाव से ठाकुरजी की सेवा करते हैं। जिस प्रकार यशोदा मैया अपने लाल कन्हैया और बलदाऊ की बुरी नजर, बाधा एवं किसी भी अपशकुन से रक्षा के लिए उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधती थीं, उसी वात्सल्य भाव से ठाकुरजी को राखी धराई जाती है। इसमें भक्त स्वयं को यशोदा मैया के वात्सल्य भाव में अनुभव करते हुए ठाकुरजी के सुख, मंगल और रक्षा की कामना करता है।

सेवायतों ने बताया कि पुष्टिमार्गीय सेवा में ठाकुरजी को केवल आराध्य मानकर पूजा नहीं की जाती, बल्कि उन्हें बालक के रूप में प्रेम, ममता और वात्सल्य से सेवा-सुख दिया जाता है। रक्षाबंधन पर राखी धराना भी इसी आत्मीय सेवा का हिस्सा है।

इस अवसर पर गाए जाने वाले कीर्तन और पदों में मैया यशोदा द्वारा अपने लाल की बलैया लेने, नजर उतारने और उन पर अपना सर्वस्व न्योछावर करने का भाव प्रकट होता है। यही वात्सल्य भाव रक्षाबंधन को पुष्टिमार्ग में विशिष्ट आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करता है।

रक्षाबंधन के अवसर पर सफेद घटा के हिंडोले में ठाकुर श्याम बिहारी जी के दर्शन और राखी की सेवा ने मंदिर परिसर में वात्सल्य एवं कृष्ण प्रेम की अनुपम अनुभूति कराई। श्रद्धालु ठाकुरजी के बाल स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते रहे।

Dr. Bhanu Pratap Singh