आगरा के कागारौल थाने में बड़ा हादसा: एसओ के सरकारी आवास की छत अचानक भरभराकर गिरी, गनीमत रही कोई हताहत नहीं

स्थानीय समाचार





आगरा जिले के कागारौल थाना परिसर में बुधवार को उस वक्त अचानक भारी हड़कंप और अफरा-तफरी मच गई, जब थाना प्रभारी (SO) अंकुर राठी के सरकारी आवास की छत अचानक भरभराकर नीचे आ गिरी। एक जोरदार और तेज धमाके के साथ छत का भारी मलबा कमरे के भीतर आ गिरा, जिससे थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों और वहां आ रहे लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि, इस भीषण दुर्घटना में सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि जिस वक्त यह हादसा हुआ, थाना प्रभारी अंकुर राठी उस कमरे में मौजूद नहीं थे, जिससे एक बहुत बड़ा जानलेवा हादसा टल गया।

​प्राथमिक जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और दीवारों में आई गहरी सीलन के कारण यह पुराना भवन अंदर से बेहद कमजोर हो चुका था। इसी जर्जर स्थिति और नमी को इस अचानक हुए हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि, घटना के पीछे के वास्तविक और तकनीकी कारणों की पूरी सच्चाई जांच-पड़ताल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। स्थानीय सूत्रों से यह बात भी सामने आई है कि जिस वक्त कमरे की छत गिरी, वहां अंदर एयर कंडीशनर (AC) चालू हालत में चल रहा था। इस तकनीकी पहलू और एसी के इस्तेमाल को लेकर भी हादसे के संभावित कारणों पर अलग-अलग चर्चाएं और कयास लगाए जा रहे हैं।

​जैसे ही छत गिरने की आवाज गूंजी, पूरे थाना परिसर में सनसनी फैल गई। आनन-फानन में मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने स्थिति का जायजा लिया और किसी अनहोनी से बचने के लिए तुरंत आसपास के जर्जर हिस्से को चारों तरफ से सुरक्षित घेराबंदी कर बंद कर दिया। इस घटना के बाद से कागारौल थाने के भीतर बने अन्य पुराने और खस्ताहाल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।

​यदि यह हादसा कुछ देर पहले हुआ होता या कमरे के अंदर कोई पुलिसकर्मी या अन्य व्यक्ति विश्राम कर रहा होता, तो उसे गंभीर चोटें आ सकती थीं। गनीमत यह रही कि समय रहते एक बड़ा संकट टल गया। फिलहाल, इस पूरी दुर्घटना की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है, और विभागीय स्तर पर इस जर्जर भवन की स्थिति की विस्तृत जांच कराए जाने की पूरी संभावना है। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस महकमे के उन पुराने और जर्जर आवासों की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है, जिनमें आज भी पुलिसकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं।




Dr. Bhanu Pratap Singh