मथुरा/वृंदावन। उत्तर प्रदेश के धार्मिक शहर मथुरा और वृंदावन में हरियाली तीज के पावन पर्व पर शनिवार को आस्था, उल्लास और श्रद्धा का एक अलग ही अलौकिक रंग देखने को मिला। जगत के आराध्य ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी महाराज साल में केवल एक बार होने वाले अपने अत्यंत दुर्लभ और विशेष ‘झूला दर्शन’ के लिए रत्नजड़ित स्वर्ण-रजत हिंडोले पर विराजमान हुए।
इन अलौकिक दर्शनों का लाभ उठाने के लिए देश के कोने-कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन पहुँचे। सुबह से ही ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर और उसके आसपास के सभी मार्गों पर भक्तों का तांता लगा रहा। इस दौरान बुजुर्गों के साथ-साथ युवाओं और ‘जेन जी’ पीढ़ी में भी ठाकुरजी के दर्शन को लेकर गजब का उत्साह और उमंग नजर आई।
हरियाली तीज के इस विशेष अवसर पर ठाकुरजी को राजधानी दिल्ली से विशेष रूप से मंगाई गई हरे रंग की आकर्षक जड़ाऊ पोशाक धारण कराई गई। इसके साथ ही रत्नजड़ित बेशकीमती स्वर्णाभूषणों से उनका भव्य श्रृंगार किया गया। पारंपरिक झूला विहार संपन्न होने के बाद उनके विश्राम के लिए विशेष ‘सुखसेज’ भी सजाई गई।
80वीं बार सजा ऐतिहासिक स्वर्ण-रजत हिंडोला
इस बार ठाकुर बांकेबिहारीजी ने अपने ऐतिहासिक स्वर्ण-रजत हिंडोले पर 80वीं बार विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। करीब 79 साल पुराने इस भव्य हिंडोले का निर्माण वर्ष 1942 से 1947 के बीच बनारस के कुशल कारीगरों द्वारा लगभग पाँच साल की कड़ी मेहनत के बाद किया गया था।
इतिहास में पहली बार वर्ष 1947 में हरियाली तीज के दिन ठाकुरजी ने इसी हिंडोले पर झूला विहार किया था। लगभग पाँच टन वजनी इस विशाल हिंडोले को कुल 180 अलग-अलग हिस्सों में तैयार किया गया है। इसकी कारीगरी इतनी बेजोड़ है कि इसमें नाचते हुए मयूर, घुमावदार सीढ़ियां, बेहद आकर्षक खंभे और भगवान श्रीकृष्ण की सखियों—ललिता, विशाखा, चित्रलेखा व रंगदेवी—की आदमकद आकृतियां उकेरी गई हैं। इस पर की गई बेल-बूटों की बारीक नक्काशी इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देती है। इस भव्य हिंडोले में लगभग 10 हजार तोला सोना और एक लाख तोला चांदी का उपयोग किया गया है।
25 साल बाद हुआ हिंडोले का विशेष नवीनीकरण
श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहे इस ऐतिहासिक हिंडोले का करीब 25 साल के लंबे अंतराल के बाद विशेष नवीनीकरण (Renovation) कराया गया है। जयपुर से आए 28 विशेष कारीगरों ने पूरी सुरक्षा और सावधानी के बीच 22 दिनों तक लगातार काम करके इसकी सफाई, मरम्मत, सोने की जड़ाई और पॉलिश का कार्य पूरा किया। इस पूरे नवीनीकरण कार्य में लगभग एक किलो सोने का इस्तेमाल किया गया और इस पर कुल डेढ़ करोड़ रुपये की लागत आई।
14 घंटे खुले मंदिर के पट, उमड़ा भारी जनसैलाब
तीज के पावन अवसर पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा दर्शन के समय में भी विस्तार किया गया। मंदिर के पट सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक तथा शाम को 4:15 बजे से रात्रि 11 बजे तक खुले रहे। इस प्रकार श्रद्धालुओं को कुल 14 घंटे तक लगातार ठाकुरजी के अलौकिक दर्शन करने का सुअवसर प्राप्त हुआ।
गौरतलब है कि पिछले साल हरियाली तीज के मौके पर लगभग छह लाख श्रद्धालु वृंदावन पहुँचे थे। इस बार स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय पर्व और शनिवार का साप्ताहिक अवकाश एक साथ होने के कारण यहाँ 10 लाख से भी अधिक श्रद्धालुओं के जुटने का अनुमान लगाया गया। इतनी विशाल भीड़ को नियंत्रित करने और सुगम व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे वृंदावन क्षेत्र को 4 सुपर जोन और 18 सेक्टरों में विभाजित किया गया। शहर में लगभग 70 स्थानों पर बैरियर लगाए गए, जबकि प्रमुख मंदिर मार्ग पर कुल 14 होल्डिंग एरिया बनाए गए।
बाहरी वाहनों की एंट्री पर पूर्ण प्रतिबंध
यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए 14 अगस्त की रात से लेकर 15 अगस्त की पूरी रात तक बाहरी वाहनों के वृंदावन शहर में प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी। श्रद्धालुओं के निजी व अन्य वाहनों के लिए शहर के बाहर स्थायी और अस्थायी पार्किंग स्थलों की व्यवस्था की गई थी। पार्किंग स्थलों से मुख्य मंदिर तक आने-जाने के लिए विशेष रूप से ई-रिक्शा और गोल्फ कार्ट का संचालन किया गया।
श्रीबांकेबिहारी मंदिर के पूरे मार्ग को आधिकारिक तौर पर ‘नो व्हीकल जोन’ घोषित किया गया था। मंदिर के भीतर प्रवेश और निकास के लिए सख्त वन-वे (One-Way) व्यवस्था लागू की गई। जुगलघाट की तरफ से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गेट नंबर दो से प्रवेश और गेट नंबर एक से बाहर निकलने का मार्ग तय किया गया था। वहीं, विद्यापीठ चौराहे की ओर से आने वाले भक्तों के लिए गेट नंबर तीन से प्रवेश तथा गेट नंबर चार से निकास की व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी।
सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम, हजारों जवान तैनात
अत्यधिक भीड़ और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए भारी मात्रा में पुलिस बल और प्रशासनिक अमला तैनात किया गया था। इस पूरी व्यवस्था की निगरानी के लिए 4 एएसपी, 12 सीओ, 70 इंस्पेक्टर, 260 सब इंस्पेक्टर, 90 महिला सब इंस्पेक्टर, 1400 कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल और 150 महिला कांस्टेबलों को ड्यूटी पर लगाया गया था। इसके अतिरिक्त यातायात पुलिस, 400 होमगार्ड, पीएसी की दो कंपनियां, फ्लड पीएसी की दो प्लाटून तथा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की एक-एक टीम भी मुस्तैद रही।
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