आगरा। आगरा के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र सुभाष बाजार में नाले के ऊपर बनी एक दोमंजिला दुकान के नाले में समा जाने और उसमें एक महिला की मौत के बाद नगर निगम की तंद्रा भंग हुई है। नाले के ऊपर सहारे बनी जर्जर दुकानों को लेकर नगर निगम ने नोटिस जारी किए। कई दुकानों पर तीन दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने के नोटिस चस्पा कर ध्वस्तीकरण की चेतावनी दी गई, जिससे व्यापारियों में भारी नाराजगी फैल गई।
विरोध बढ़ने पर नगरायुक्त संतोष कुमार वैश्य ने व्यापारियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद नगर निगम ने स्पष्ट किया कि फिलहाल केवल जर्जर दुकानों को ही नोटिस जारी किए जा रहे हैं और सभी अभिलेखों की जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
नगर निगम द्वारा दुकानों पर लगाए गए नोटिस में कहा गया है कि संबंधित दुकानें करीब 60 से 70 वर्ष पुराने और जर्जर नाले के ऊपर या उसके सहारे बनी हुई हैं। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि तीन दिन की निर्धारित समय-सीमा के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो नगर निगम नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। आवश्यकता पड़ने पर बुलडोजर भी चलाया जा सकता है।
नोटिस लगते ही सुभाष बाजार के व्यापारियों में खलबली मच गई। व्यापारियों का कहना है कि नगर निगम का संपत्ति विभाग वर्षों से इन दुकानों का किराया वसूलता रहा है, जबकि अब अतिक्रमण विभाग इन्हीं दुकानों को अवैध कब्जा बताकर हटाने की कार्रवाई कर रहा है। व्यापारियों ने इसे नगर निगम की परस्पर विरोधी कार्यप्रणाली बताते हुए सवाल उठाए हैं।
विवाद बढ़ने के बाद नगरायुक्त संतोष कुमार वैश्य ने व्यापारियों के साथ बैठक कर उनकी आपत्तियां और सुझाव सुने। बैठक के बाद नगर आयुक्त ने बताया कि व्यापारियों के साथ पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में केवल उन दुकानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जो जर्जर स्थिति में हैं और सुरक्षा की दृष्टि से जोखिम पैदा कर रही हैं।
नगरायुक्त ने यह भी कहा कि जिन दुकानों के निजी स्वामी हैं, उनसे अपने भवनों की आवश्यक मरम्मत कराने का अनुरोध किया गया है, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे।
बैठक के दौरान व्यापारियों ने नगर निगम की आठ दुकानों को लेकर नया निर्माण कराने का प्रस्ताव भी रखा। इस पर नगरायुक्त ने बताया कि इस संबंध में 1977 से पहले के उपलब्ध रिकॉर्ड, पत्रावलियों और अन्य अभिलेखों की विस्तृत जांच कराई जाएगी। व्यापारियों से भी कहा गया है कि यदि उनके पास दुकानों से संबंधित कोई दस्तावेज या रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, तो वे उन्हें नगर निगम को उपलब्ध कराएं।
नगरायुक्त के अनुसार सभी अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद ही नियमानुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आगे की कार्रवाई पर अंतिम फैसला नहीं किया जाएगा।
फिलहाल नगर निगम और व्यापारियों के बीच संवाद का रास्ता खुलने से तत्काल टकराव की स्थिति कुछ हद तक टल गई है, लेकिन अब पूरे मामले की दिशा 1977 से पहले के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच पर निर्भर करेगी।
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