लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ओर जहां ओम प्रकाश राजभर समाजवादी पार्टी (SP) में बड़ी टूट का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके ही घर में ‘पार्टी की सेहत’ को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और महासचिव अरुण राजभर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे खुद यह स्वीकार करते हुए नजर आ रहे हैं कि उनकी पार्टी के 7 में से 4 विधायक समाजवादी पार्टी का झंडा उठाकर चल रहे हैं।
अरुण राजभर का चौंकाने वाला कबूलनामा
एक टीवी डिबेट के दौरान जब पत्रकार ने ओम प्रकाश राजभर द्वारा सपा को तोड़ने के दावों पर सवाल उठाया, तो अरुण राजभर ने तपाक से कहा, “हमारी पार्टी के 6-7 विधायक हैं, जिनमें से 4 विधायक सपा का झंडा लेकर घूम रहे हैं।” इस बयान के बाद पत्रकार ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या इसका मतलब यह नहीं है कि सुभासपा खुद टूटने की कगार पर है? इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए अरुण राजभर ने इसे ‘पब्लिक डोमेन’ की बात बताया और कहा कि 2022 के चुनाव में सपा ने सोची-समझी रणनीति के तहत प्रत्याशी भेजे थे।
विधायकों का गणित और बगावती सुर
आंकड़ों पर गौर करें तो 2022 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा के 6 विधायक जीते थे, जिनमें ओम प्रकाश राजभर, बेदीराम, हंसू राम, अब्बास अंसारी, राम नरेश राजभर और डॉ. महेंद्र राजभर शामिल थे। वर्तमान में इनमें से कई विधायक सपा खेमे के अधिक करीब दिखाई देते हैं। खास तौर पर मऊ सदर से विधायक अब्बास अंसारी की सपा के प्रति बढ़ती नजदीकियां और अखिलेश यादव से उनकी मुलाकातें सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
राजभर का दावा: “सपा में तय है बड़ी टूट”
एक तरफ पार्टी के भीतर के इस बिखराव की खबरें हैं, तो दूसरी तरफ ओपी राजभर लगातार दावा कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी में भगदड़ मचना तय है। राजभर का कहना है कि सपा के वरिष्ठ नेता राम गोपाल यादव की गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद सपा के भीतर घबराहट है। वे खनन और गोमती रिवर फ्रंट घोटाले का जिक्र करते हुए कहते हैं कि शिकंजा कसने के कारण सपा परेशान है।
भाजपा और सहयोगियों का दांव
केवल राजभर ही नहीं, बल्कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद भी सपा में बड़ी टूट का दावा कर रहे हैं। केशव प्रसाद मौर्य का तो यहाँ तक कहना है कि सपा के 20-25 सांसद भाजपा के संपर्क में हैं। बहरहाल, सपा की टूट के दावों के बीच सुभासपा के अपने विधायकों का ‘सपा प्रेम’ इस पूरी राजनीतिक पटकथा को और भी दिलचस्प बना रहा है।
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