फतेहाबाद (आगरा): कस्बा फतेहाबाद के एक घनी आबादी वाले मोहल्ले में मोबाइल टावर की स्थापना को लेकर स्थानीय निवासियों का आक्रोश गहरा गया है। निवासियों का आरोप है कि नगर पंचायत द्वारा अनुमति निरस्त किए जाने के बावजूद एक निजी कंपनी द्वारा रिहायशी क्षेत्र के बीचोंबीच जबरन टावर लगाया जा रहा है। इस मामले में जिलाधिकारी और अधिशासी अधिकारी से शिकायत कर निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
क्या है विवाद?
स्थानीय लोगों के अनुसार, इंडस टावर लिमिटेड द्वारा सतीश चंद्र के आवासीय प्लॉट पर मोबाइल टावर लगाने का काम किया जा रहा है। विरोध कर रहे निवासियों का कहना है कि यह क्षेत्र पूरी तरह से रिहायशी है, जहाँ सघन मकान बने हुए हैं और कई परिवार निवास करते हैं। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर घनी बस्ती में टावर का निर्माण निवासियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकता है।
आवेदन निरस्त, फिर भी काम जारी
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मोबाइल टावर के लिए कंपनी ने नगर पंचायत फतेहाबाद में आवेदन किया था, जिसे 24 दिसंबर 2025 को ही निरस्त कर दिया गया था। निवासियों का आरोप है कि अनुमति निरस्त होने के बाद भी कंपनी द्वारा निर्माण कार्य जारी रखा गया है, जो कि पूरी तरह से अवैध है।
दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप
इस मामले में सबसे गंभीर आरोप ‘स्थान’ को लेकर लग रहे हैं। निवासियों का कहना है कि कंपनी ने जो नक्शे और दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, उसमें टावर का स्थान ‘फतेहाबाद-आगरा रोड’ के निकट दिखाया गया है, जबकि जमीनी हकीकत में इसे ‘शमशाबाद-फतेहाबाद मार्ग’ से 500 मीटर अंदर एक तंग गली में स्थापित किया जा रहा है। दस्तावेजों में दर्ज स्थान और वास्तविक निर्माण स्थल के बीच यह अंतर भारी धांधली की ओर इशारा करता है।
सुरक्षा मानकों का घोर अभाव
निवासियों ने बताया कि टावर के लिए चुनी गई जगह तक पहुंचने का रास्ता मात्र 10 फीट चौड़ा है, जिसमें चार एल-आकार के तीखे मोड़ भी हैं। निवासियों ने चिंता जताई है कि यदि भविष्य में कोई तकनीकी खराबी, आगजनी या आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो वहां फायर ब्रिगेड या राहत-बचाव दल का पहुंचना असंभव होगा।
डीएम से लगाई न्याय की गुहार
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी आगरा और नगर पंचायत फतेहाबाद के अधिशासी अधिकारी को लिखित शिकायत भेजकर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की है। निवासियों का कहना है कि जब तक वैधानिक अनुमतियों और सुरक्षा मानकों की स्पष्ट पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इस निर्माण को किसी भी हाल में पूरा नहीं होने दिया जाएगा।
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