लखनऊ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर देशभर में जारी विरोध के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी इस मुद्दे पर सियासी बयानबाज़ी थमती नजर नहीं आ रही है।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए यूजीसी समता विनियमन कानून 2026 का विरोध करने वालों पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि जिन चेहरों को आज विरोध करते देखा जा रहा है, वे वही लोग हैं जिनके पूर्वजों को समाज ने धर्म के नाम पर दान-दक्षिणा और चढ़ावा दिया है। उन्होंने एससी, एसटी और ओबीसी समुदाय से अपील करते हुए कहा कि ऐसी मानसिकता वाले लोगों को आर्थिक और सामाजिक सहयोग देना बंद कर देना चाहिए।
अपने पोस्ट में मौर्य ने ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कुछ उच्च जातियों के लोग आज भी वंचित वर्गों के साथ भेदभाव और अत्याचार को अपना अधिकार समझते हैं, इसी वजह से वे यूजीसी कानून का विरोध कर रहे हैं।
इससे पहले भी वह यूजीसी के नए नियमों पर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना था कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के नाम पर लाया गया कानून वास्तविक रूप से पिछड़े वर्गों को भ्रमित करने का प्रयास है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर कानून बनाकर एससी-एसटी-ओबीसी समाज को खुश करने की कोशिश की गई, वहीं दूसरी ओर इसके खिलाफ माहौल भी तैयार कराया गया।
मौर्य ने यह भी दावा किया कि सरकार की रणनीति दोहरे रवैये की रही, जिसके चलते अंततः सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर होने और नियमों के क्रियान्वयन पर रोक लगने जैसी स्थिति बनी। उन्होंने इसे “शतरंज की चाल” बताते हुए समर्थकों से सतर्क रहने की अपील की।
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