आगरा: 2003 में, वाइल्डलाइफ एसओएस ने एक युवा मादा स्लॉथ भालू शावक को ‘डांसिंग’ भालुओं की क्रूर प्रथा से बचाया था, जिसके बाद उसका जीवन उपचार और आशा के पथ पर अग्रसर हुआ। आज, जैस्मीन, आगरा भालू संरक्षण केंद्र की सबसे बुजुर्ग भालुओं में से एक है, जिसका जिज्ञासु और कोमल स्वभाव है। जैस्मिन को उत्तर प्रदेश की सड़कों पर नाचते हुए भालू की क्रूर प्रथा से बचाया गया था और इस वर्ष, वाइल्डलाइफ एसओएस जैस्मीन की स्वतन्त्रता की 22वीं वर्षगांठ मना रहा है।
बचाए गए अनेक डांसिंग भालुओं की तरह, जैस्मीन भी रेस्क्यू के समय एक शावक थी, और उसे भारी शारीरिक और भावनात्मक आघात सहना पड़ रहा था। अपनी माँ से अलग करके, उसकी नाज़ुक थूथन में एक लाल-गर्म लोहे की छड़ चुभोकर छेद कर दिया गया, उसमें रस्सी डाली गई, और मनोरंजन समझकर अप्राकृतिक प्रदर्शन करने के लिए उसे मजबूर किया गया। हालाँकि, बचाए जाने के बाद, आगरा भालू संरक्षण केंद्र में वाइल्डलाइफ़ एसओएस टीम ने करुणा से काम लिया और उसके शारीरिक घावों और अदृश्य भावनात्मक घावों, दोनों को कम करने में उसकी देखभाल की।
आज, जैस्मीन की ज़िंदगी बहुत बदल गई है। वह उन बुज़ुर्ग भालुओं में से एक हैं, जिसे कीड़े-मकोड़ों और दीमकों को खोदकर खाने का शौक है। जैस्मीन को शहद, नारियल और खजूर से भरे रोलिंग बैरल फीडर जैसी चीज़ों से खेलने में बहुत मज़ा आता है। ये चीज़ें उसके मन को व्यस्त और पेट को तृप्त रखती हैं। उसे गर्मी में बर्फ से जमी आइस-पॉप्सिकल्स भी बहुत पसंद हैं और गर्मियों में वह पूल के ठंडे पानी का आनंद लेती हैं। अपने झूले पर लेटे हुए, वह एयर-कूलर की ठण्ड हवा खाते हुए सो जाती हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ, कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “जैस्मीन का एक शावक से हमारे केंद्र में एक वरिष्ठ सदस्य बनते देखना दिल को छू लेने वाला सफ़र रहा है। वह एक दृढ़ निश्चयी आत्मा रही है और हमें उसे हमारे साथ 22 साल पूरे करते देखकर खुशी हो रही है।”
वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक, डॉ. इलियाराजा एस ने कहा, “पिछले दो दशकों से जैस्मीन की देखभाल करना एक चुनौतीपूर्ण लेकिन संतोषजनक अनुभव रहा है। प्रत्येक स्लॉथ भालू अद्वितीय होता है, और हम उनके स्वास्थ्य प्रोटोकॉल को इस तरह से तैयार करते हैं कि उन्हें सर्वोत्तम संभव जीवन स्तर मिल सके।”
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक और सचिव, गीता शेषमणि ने कहा, “जैस्मीन की कहानी इस बात का सच्चा उदाहरण है कि अगर मानवीय करुणा का सही इस्तेमाल किया जाए, तो वह क्या कुछ कर सकती है। जैस्मीन ने देखभाल और सम्मान से भरपूर जीवन जीने के लिए भारी कठिनाइयों को पार किया है।”
-up18News
- किरावली को मिला जनसेवा का नया ‘तीर्थ’: सांसद राजकुमार चाहर ने 95.63 करोड़ की योजनाओं का किया शिलान्यास, अब जनता के द्वार होगा समाधान - March 14, 2026
- Agra News: बेटियों के सपनों को मिले ‘साइकिल के पंख’; भारत विकास परिषद् ने 51 छात्राओं को भेंट की साइकिल, अब आसान होगी शिक्षा की राह - March 14, 2026
- नेशनल चैम्बर चुनाव: मनोज बंसल के सिर सजा जीत का ताज, कांटे की टक्कर में 19 वोटों से पछाड़ा; अम्बा प्रसाद और नीतेश बने उपाध्यक्ष - March 14, 2026