आगरा। फाग पूर्णिमा व चैतन्य महाप्रभु के 539 वें जन्मोत्सव पर कमलानगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन) में पूर्णिमा महामहोत्सव का आयोजन किया गया।
शुक्रवार को प्रातः 4.30 बजे मंगला आरती के साथ ही भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व भाई बलराम का श्वेत पोशाक धारण कराकर विशेष श्रंगार किया गया। इस अवसर पर छप्पन भोग व फूल बंगला का भी आयोजन किया गया।
शाम 5 बजे गौर कथा में श्रीकृष्ण का स्वरूप चैतन्य महाप्रभु के जन्मोत्सव के प्रसंग व लीलाओं से भक्तों को परिचित कराया गया। इस्कॉन आगरा के अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप ने बताया कि श्रीकृष्ण का ब्रज विलुप्त हो गया था। जो आज का ब्रज है, उसे चैतन्य महाप्रभु ने अपने शिष्यों की सहायता से खोजा। युग धर्म का प्रचार करने अपने पार्षदों के साथ साक्षात श्रीकृष्ण चैतन्य महाप्रभु के रूप में धरती पर अवतरित हुए थे।
उन्होंने बताया कि भक्ति आंदोलन (नगर कीर्तन) के प्रणेता भी चैतन्य महाप्रभु ही थे। संध्या काल में पंचामृत व पंचगव्य से चैतन्य महाप्रभु का मंत्रोच्चारण के साथ अभिषेक किया गया। इसके उपरान्त मृदंग मंजीरों संग कीर्तन करते हुए गौर निताई की पालकी निकाली गई। हरिनाम संकीर्तन पर श्रीकृष्ण की भक्ति में हर भक्त झूमता नजर आया।
शनिवार यानि आज चैतन्य महाप्रभु के पसंद के व्यंजन लॉकी की खीर, कटहल के बीज, चावल आदि का प्रसाद लगाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्य रूप से शैलेन्द्र अग्रवाल, कामता प्रसाद अग्रवाल, अदिति गौरंगी, शैलेश बंसल, सुनील मनचंदा, संजीव मित्तल, सुशील अग्रवाल, विकास बंसल, राहुल बंसल, ओमप्रकाश अग्रवाल, राजेश उपाध्यक्ष, संजय कुकरेजा, विपिन अग्रवाल, शाश्वत नंदलाल आदि उपस्थित थे।
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