मथुरा लोकसभा सीट से दो बार की भाजपा सांसद हेमा मालिनी के सामने कांग्रेस अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सर विजेंदर सिंह को चुनाव लड़वाना चाहती थी। बॉक्सर विजेंदर पूर्व में भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके थे। हालांकि वह चुनाव हार गए। जाट बाहुल्य सीट पर होने के कारण कांग्रेस का यह जाट कार्ड सभी को चौंका गया था लेकिन आज विजेंदर सिंह ने भाजपा में शामिल होकर कांग्रेस को ही न सिर्फ चौंका दिया बल्कि जोरदार झटका दे दिया।
दूसरे चरण में है मतदान, कल नामांकन का आखिरी दिन
मथुरा लोकसभा सीट पर दूसरे चरण यानी 26 अप्रैल को वोटिंग होगी। चुनाव के नतीजे चार जून को आ जाएंगे।
हेमा मालिनी ने दो बार दर्ज की जीत
भाजपा प्रत्याशी हेमा मालिनी ने पिछले दो लोकसभा चुनावों यानी 2014 और 2019 में मथुरा लोकसभा सीट से जीत हासिल की थी। साल 2019 हेमा मालिनी को टक्कर देने के लिए 12 अन्य उम्मीदवार मैदान में थे। कांग्रेस ने महेश पाठक, राष्ट्रीय लोक दल ने कुंवर नरेंद्र सिंह, स्वतंत्र जनताराज पार्टी ने ओम प्रकाश को मैदान में उतारा था मगर हेमा मालिनी ने जोरदार जीत हासिल की थी। साल 2014 में भी हेमा मालिनी ने यहां जीत दर्ज की थी। बीजेपी ने मथुरा लोकसभा सीट पर लगातार तीसरी बार हेमा मालिनी को उतारा है।
बसपा से भी जाट प्रत्याशी मैदान में
हेमा मालिनी के सामने बॉक्सर विजेंदर सिंह का नाम सामने आने पर मथुरा के लोगों को भी कुछ समय के लिए रोमांच का अनुभव हुआ क्योंकि कृष्ण की नगरी मथुरा में जाट मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है। बॉक्सर विजेंदर सिंह चूंकि जाट बिरादरी से आते हैं इसलिए कांग्रेस को उम्मीद थी कि वह हेमा मालिनी से टक्कर ले सकेंगे परंतु विजेंदर सिंह ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। हालांकि इस बार जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोकदल को एनडीए का हिस्सा बनाकर बीजेपी ने पहले ही जाट मतदाताओं को काफी हद तक अपने पक्ष में खड़ा कर लिया है।
उधर बहुजन समाज पार्टी ने भी अपने घोषित प्रत्याशी कमलकांत उपमन्यु का टिकट काटकर एक पूर्व सरकारी अधिकारी सुरेश चौधरी को मथुरा से मैदान में उतार दिया है। गोवर्धन क्षेत्र के मूल निवासी सुरेश चौधरी भी जाट बिरादरी से ही ताल्लुक रखते हैं।
हेमा मालिनी भी अभिनेता धर्मेन्द्र की दूसरी पत्नी होने के नाते खुद को जाट बिरादरी से जोड़ती रही हैं।
ऐसे में अब जबकि बॉक्सर विजेंदर सिंह ने भी कमल का हाथ थाम लिया है तो एक ओर जहां कांग्रेस के सामने उम्मीदवार खड़ा करने का भी बड़ा संकट सामने आ खड़ा हुआ है क्योंकि कल नामांकन का आखिरी दिन है वहीं दूसरी ओर हेमा मालिनी का रास्ता पूरी तरह साफ होता दिखाई दे रहा है। जहां तक सवाल बसपा प्रत्याशी सुरेश चौधरी का है तो उनके लिए भाजपा से फिलहाल मुकाबला करना लोहे के चने चबाने के बराबर है।
-एजेंसी
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