मॉनसून सत्र से पहले सियासी माहौल गर्म: मायावती की सरकार-विपक्ष से अपील, ‘हंगामे की भेंट न चढ़े सदन, जनहित पर हो चर्चा’

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नई दिल्ली। संसद का मॉनसून सत्र कल, 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। सत्र के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने आज एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों से सहयोग का आग्रह किया जाएगा। इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों के पेश होने और उनके पारित होने की प्रबल संभावना है।

​मायावती की सरकार और विपक्ष को नसीहत

सत्र की पूर्व संध्या पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया के माध्यम से सत्ता पक्ष और विपक्ष को जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता दिखाने की अपील की है। उन्होंने चिंता जताई कि क्या इस बार भी संसद का सत्र हंगामे और स्थगन की भेंट चढ़ जाएगा, या फिर देश के गंभीर मुद्दों पर सार्थक चर्चा होगी।

​उठाए ये ज्वलंत मुद्दे

मायावती ने अपने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि देश इस समय महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, महिला असुरक्षा और महत्वपूर्ण परीक्षाओं के पेपर लीक जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी, हेराफेरी और गबन के व्यापक जन आक्रोश का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सड़कों से लेकर अदालत तक गूंज रहा है और संसद में भी इसका उठना निश्चित है।

संविधान और अर्थव्यवस्था पर चिंता

बसपा सुप्रीमो ने अपनी बात विस्तार से रखते हुए कहा कि केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने बंगाल में चुनाव बाद की स्थिति, राजस्थान में स्वास्थ्य व्यवस्था की विफलता, चुनावी रेवड़ियों में धांधली, सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और पुलिस एनकाउंटर की संस्कृति जैसे विषयों पर सरकार को घेरा। इसके साथ ही, उन्होंने अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध और रुपये के अवमूल्यन को भी देश के लिए बड़ी चुनौती बताया।

​लोकतांत्रिक परंपरा के पालन की अपील

मायावती ने सत्ता और विपक्ष दोनों से आह्वान किया कि वे राजनीतिक द्वेष और संकीर्णता को त्यागकर एकजुट हों। उन्होंने कहा, “संसद का मॉनसून सत्र बिना किसी उत्तेजना या विद्वेष के, स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप चलना चाहिए। 140 करोड़ की जनसंख्या वाले हमारे देश में बहुजनों का भविष्य दांव पर है, इसलिए जनहितैषी ‘गुड गवर्नेंस’ के लिए संसद का प्रभावी होना अत्यंत आवश्यक है।”

Dr. Bhanu Pratap Singh