वाराणसी। वाराणसी स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की दोनों विधान परिषद (MLC) सीटों पर समाजवादी पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मंगलवार को पहली बार काशी (वाराणसी) पहुंचे। बाबतपुर हवाई अड्डे (एयरपोर्ट) पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों और गगनभेदी नारों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया।
काशी की धरती पर उतरते ही अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि लखनऊ में बैठी राज्य सरकार केंद्र की दिल्ली सरकार को धोखा दे रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश से भाजपा के सत्तामुक्त होते ही बनारस के किसान, बुनकर और युवा खुलकर मुस्कुराएंगे।
एमएलसी चुनाव में जीत बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद
बाबतपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से रूबरू होते हुए अखिलेश यादव ने वाराणसी की दोनों एमएलसी सीटों पर मिली विजय को बाबा विश्वनाथ की असीम कृपा और देवतुल्य जनता का अटूट भरोसा करार दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक सीट से आशुतोष सिन्हा और स्नातक सीट से लाल बिहारी यादव की जीत यह साबित करती है कि शिक्षित वर्ग और शिक्षक समाज अब भाजपा की नीतियों से पूरी तरह ऊब चुका है। यह सफलता समाजवादी पार्टी के लिए आगामी राजनीतिक महासमर का एक बेहद उत्साहजनक और सकारात्मक संकेत है।
क्योटो मॉडल, मेट्रो और मां गंगा की सफाई पर घेरा
काशी को जापान के ‘क्योटो’ शहर की तर्ज पर विकसित करने के भाजपा के पुराने वादे पर तीखा तंज कसते हुए सपा प्रमुख ने कहा, “सरकार इतने सालों में बनारस को क्योटो तो नहीं बना पाई, कम से कम क्योटो की एक तस्वीर ही शहर के चौराहों पर लगा देती।” उन्होंने शहर में सीवर व नालों के उफान और मेट्रो रेल परियोजना के अधर में लटके होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही वाराणसी में मेट्रो निर्माण का कार्य प्राथमिकता से पूरा किया जाएगा।
इसके साथ ही अखिलेश यादव ने काशी की रीढ़ माने जाने वाले बुनकरों की दयनीय आर्थिक स्थिति और ‘मां गंगा’ की स्वच्छता के नाम पर हुए कथित दावों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने बनारस के पारंपरिक बुनकर समाज को उपेक्षित छोड़ दिया है और मां गंगा की सफाई को लेकर किए गए बड़े-बड़े वादे केवल कागजी साबित हुए हैं।
केदारेश्वर मंदिर और धार्मिक बयानों पर साधा निशाना
धार्मिक और वैचारिक मुद्दों पर भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ और भगवान केदारेश्वर के प्रति उनकी और उनकी पार्टी की अटूट निष्ठा है। उन्होंने याद दिलाया कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में ही काशी में पौराणिक केदारेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार व निर्माण कार्य कराया गया था। उन्होंने तंज कसा कि आस्था के नाम पर राजनीति करने वाले लोग भी बिना हाथ जोड़े और बिना शीश नवाए मंदिर से बाहर नहीं निकलते। इसके साथ ही उन्होंने हाल के दिनों में भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के नाम पर दिए जा रहे विवादास्पद बयानों तथा यूजीसी (UGC) से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार की नियत पर सवाल खड़े किए।
कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में हुए शामिल, जाना सतीश फौजी का हाल
अपनी राजनीतिक बयानबाजी के बीच अखिलेश यादव का मुख्य कार्यक्रम पार्टी के दिवंगत नेताओं के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाना रहा। वे सीर गोवर्धनपुर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने समाजवादी पार्टी के दिवंगत नेता व पूर्व जिला उपाध्यक्ष राजेश कुमार यादव उर्फ नत्थू के अचानक हुए निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और शोकाकुल परिजनों से मिलकर संवेदना जताई।
इसके पश्चात सपा प्रमुख युवजन सभा के प्रदेश सचिव अजय फौजी के आवास पहुंचे। वहां उन्होंने लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे उनके पूज्य पिता एवं सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सतीश फौजी का कुशलक्षेम जाना और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
सुंदरपुर में ‘पीडीए’ और चुनावी रणनीति पर महामंथन
दौरे के अंतिम चरण में अखिलेश यादव सुंदरपुर स्थित ‘लता कुंज’ में पूर्व आईआरएस (IRS) अधिकारी राजेश सिंह के निवास पहुंचे। यहां पार्टी के जिला व महानगर पदाधिकारियों, विधायकों और प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में एमएलसी चुनाव के नतीजों की समीक्षा की गई और आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर संगठन की मजबूती, ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीतिक लामबंदी और बूथ प्रबंधन की भावी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।
एमएलसी चुनाव में शानदार जीत के बाद अखिलेश यादव के इस आक्रामक काशी दौरे ने वाराणसी और पूर्वांचल के राजनीतिक पारे को एक बार फिर गर्मा दिया है।
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