लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की 11 सीटों के परिणाम घोषित होने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रशासनिक तंत्र पर तीखा हमला बोला है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि गोरखपुर खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना के दौरान भारी घपलेबाजी करके सपा प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी को हराने की सोची-समझी साजिश रची गई है।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “भ्रष्ट भाजपाइयों और इसमें संलिप्त अधिकारियों ने चुनाव जीतने के लिए लोकतांत्रिक मर्यादाओं की सारी हदें पार कर दीं। भाजपा वोट से नहीं, बल्कि खोट से चुनाव जीत रही है।”
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”शिक्षक समाज भाजपा को हराकर अपना गुरु संकल्प पूरा करेगा”: अखिलेश यादव
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में अखिलेश यादव ने लिखा कि डॉ. संजयन त्रिपाठी को हराने की वजह सिर्फ उनका सपा उम्मीदवार होना नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष की ‘हाता नहीं भाता’ वाली मानसिकता है। उन्होंने कहा कि डॉ. त्रिपाठी के उत्पीड़न और उनके आंसुओं को शिक्षक समाज कभी भूल नहीं पाएगा। शिक्षकों का अपमान करने वाली भाजपा को 2027 के विधानसभा चुनाव में शिक्षक समाज पूरी तरह हराकर अपना ‘गुरु संकल्प’ पूरा करेगा।
”सीसीटीवी फुटेज से हमलावरों का होगा पर्दाफाश”: डॉ. आकाश अग्रवाल
उधर, आगरा खंड शिक्षक एमएलसी सीट पर द्वितीय वरीयता की मतगणना के बाद ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाले सपा प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने लगभग 3,700 वोटों की निर्णायक बढ़त बनाकर जीत का परचम फहराया। औपचारिक घोषणा के लिए चुनाव आयोग से अनुमति मांगी गई है।
जीत के बाद मतगणना स्थल पर देर रात हुई हाथापाई और कुर्ता फाड़े जाने के विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. आकाश ने कहा कि “विवाद की शुरुआत भाजपा प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने की थी। मतगणना कक्ष (Counting Room) में लगे सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) की जांच से पूरी सच्चाई और हमलावरों का चेहरा जनता के सामने बेनकाब हो जाएगा।”
”नौकरी की सुरक्षा चाहने वाले शिक्षक सपा के साथ”: लाल बिहारी यादव
वहीं, वाराणसी खंड शिक्षक सीट पर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने वाले सपा के लाल बिहारी यादव ने पार्टी नेतृत्व और शिक्षक समाज का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह संस्थापक ‘नेताजी’ (मुलायम सिंह यादव) को शिक्षकों का सच्चा संरक्षक माना जाता था, वही दूरदर्शी सोच वर्तमान अध्यक्ष अखिलेश यादव की भी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस चुनाव पर यूजीसी बिल का कोई प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि उससे जुड़े लोग आपस में बंटे रहे; जबकि अपनी नौकरी की सुरक्षा और सम्मान चाहने वाले सभी शिक्षक एकजुट होकर समाजवादी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहे।
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