आगरा। मलपुरा थाना क्षेत्र में जन्मदिन की पार्टी के बाद एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान शिवम के रूप में हुई है। उसका शव बुधवार को धनौली पुलिस चौकी के पास एक नाले में मिला। परिजनों का आरोप है कि जन्मदिन मना रहे युवकों को पुलिसकर्मियों ने दौड़ाया, कई युवकों को पकड़कर चौकी ले गए और छोड़ने के नाम पर कथित तौर पर रुपये लिए गए। इसी दौरान शिवम भी वहां से भागा था। इसके बाद वह लापता हो गया और दो दिन बाद उसका शव चौकी से कुछ ही दूरी पर नाले में मिला।
परिजनों ने पुलिसकर्मियों पर शिवम की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि पकड़े गए युवक नाबालिग थे और उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। पुलिस की ओर से यह भी कहा जा रहा है कि भागते समय युवक नाले में गिर गया होगा। अब सवाल यह है कि आखिर शिवम चौकी के पास नाले तक कैसे पहुंचा और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई?
सड़क पर मनाया जा रहा था जन्मदिन
जानकारी के मुताबिक सोमवार को नगला प्यारे निवासी वरुण का जन्मदिन था। गांव के करीब दो दर्जन युवक जन्मदिन मनाने के लिए एकत्र हुए थे। नगला प्यारे-सोहल्ला रेलवे फाटक सदर थाना क्षेत्र में आता है, जबकि यह इलाका मलपुरा थाने की सीमा से सटा हुआ है। बताया गया है कि युवक धनौली पुलिस चौकी के पास केएल गार्डन के सामने सड़क पर केक काटकर जन्मदिन मना रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और युवकों को वहां से हटाने के लिए दौड़ाना शुरू कर दिया। परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने कई युवकों के साथ मारपीट भी की। आधा दर्जन से अधिक युवकों को पकड़कर धनौली चौकी ले जाया गया।
युवकों को छुड़ाने पहुंचे साथी, फिर मची भगदड़
वरुण को पुलिस द्वारा पकड़े जाने की जानकारी मिलने के बाद उसके अन्य साथी भी धनौली चौकी पहुंच गए। उन्होंने पुलिसकर्मियों से युवकों को छोड़ने की मांग की। आरोप है कि इसी दौरान पुलिसकर्मियों ने डंडे उठा लिए, जिसके बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। युवक जान बचाकर अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। आरोप है कि पुलिसकर्मी भी उनके पीछे करीब 50 मीटर तक दौड़े। इसी दौरान शिवम भी भागा। परिजनों का दावा है कि शिवम पहले से घायल था। इसके बावजूद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाने के बजाय दोबारा दौड़ाया गया। इसके बाद पुलिस ने कुछ युवकों को फिर पकड़ लिया।
‘छोड़ने के लिए 32 हजार रुपये लिए’
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि युवकों को छोड़ने के बदले कथित तौर पर करीब 32 हजार रुपये लिए गए। आरोप है कि रकम लेने के बाद युवकों को एक-एक करके छोड़ दिया गया। इस आरोप को लेकर पुलिस से भी सवाल किए जा रहे हैं। घटनास्थल पर मौजूद एक युवक ने पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में कथित तौर पर बताया कि उसे छोड़ने के एवज में भी छह हजार रुपये लिए गए थे। यह बात सामने आने के बाद मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी कथित तौर पर चुप रहे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पूरे मामले में जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में किसी पुलिसकर्मी द्वारा कोई अवैध वसूली की गई थी या नहीं।
देर रात तक घर नहीं लौटा शिवम
शिवम के पिता प्रेमपाल सिंह के मुताबिक, उनका बेटा देर रात तक घर नहीं लौटा तो परिवार को चिंता हुई। उन्होंने रिश्तेदारों और परिचितों के यहां तलाश की, लेकिन शिवम का कोई पता नहीं चला। परिजन सदर थाने पहुंचे और शिवम के लापता होने की सूचना दी। पुलिस ने मामले में अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद परिवार उसकी तलाश में जुटा रहा।
दो दिन बाद चौकी के पास नाले में मिला शव
बुधवार को परिवार को सूचना मिली कि धनौली पुलिस चौकी के पास एक नाले में युवक का शव पड़ा है। परिजन मौके पर पहुंचे तो शव की पहचान शिवम के रूप में हुई। परिजनों के मुताबिक शिवम के सिर पर चोट का निशान था। इसके बाद परिवार ने उसकी मौत को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि अगर युवक पुलिस से बचकर भाग रहा था तो वह चौकी के पास स्थित नाले तक कैसे पहुंचा? क्या वह खुद नाले में गिरा या उसके साथ कुछ और हुआ? परिवार इन सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है।
‘नाला कवर है, फिर शिवम उसमें कैसे गिरा?’
परिजनों और ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल नाले को लेकर है। उनका कहना है कि जिस जगह शव मिला, वह नाला पूरी तरह खुला नहीं है। उसके ऊपर कवर है और आसपास खोखे भी रखे हुए हैं। ऐसे में परिवार सवाल उठा रहा है कि अगर पुलिस के मुताबिक शिवम भागते समय नाले में गिरा, तो वह कवर किए गए नाले के अंदर कैसे पहुंचा? इन सवालों का जवाब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल की जांच, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों से मिलने की उम्मीद है।
चौकी के सीसीटीवी फुटेज जांच के केंद्र में
परिजनों ने मांग की है कि धनौली चौकी पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तत्काल सुरक्षित कराई जाए। उनका कहना है कि फुटेज से यह स्पष्ट हो सकता है कि जन्मदिन मना रहे युवकों को कब चौकी लाया गया, कौन-कौन पुलिसकर्मी वहां मौजूद थे, युवक कब छोड़े गए और शिवम आखिरी बार किस स्थिति में दिखाई दिया। परिजनों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के साथ पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
शव पहुंचते ही फिर भड़का आक्रोश
शव मिलने के बाद ग्रामीणों और परिजनों में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए धनौली चौकी पर हंगामा किया। आक्रोशित लोगों ने मार्ग जाम करने का प्रयास भी किया। शाम करीब सात बजे जब शिवम का शव घर पहुंचा, तो एक बार फिर लोगों का गुस्सा भड़क उठा। परिवार और ग्रामीण मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
मंगलवार को ही जांच होती तो सामने आ सकता था पूरा घटनाक्रम
परिजनों का कहना है कि मंगलवार को जब शिवम के लापता होने की सूचना पुलिस को दी गई थी, उसी समय घटनाक्रम की गंभीरता से पड़ताल की जाती तो जन्मदिन की पार्टी और युवकों को पुलिस द्वारा खदेड़े जाने की बात सामने आ सकती थी। उनका आरोप है कि यदि समय रहते आसपास के सीसीटीवी , चौकी की फुटेज और घटनास्थल की जांच की जाती तो शिवम की तलाश में भी महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते थे। बुधवार को संयोग से किसी ग्रामीण की नजर नाले में पड़े शव पर पड़ी और पुलिस को सूचना दी गई। खास बात यह है कि शव मिलने की जगह धनौली पुलिस चौकी से कुछ ही कदम की दूरी पर बताई जा रही है।
पुलिस पर बढ़ते भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच नया मामला
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब आगरा पुलिस कमिश्नरेट में पुलिसकर्मियों पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोपों को लेकर पहले भी कार्रवाई हुई है। अगस्त के अंत में पुलिस आयुक्त ने भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के बाद छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया था और सदर व जगनेर के थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर किया गया था। सितंबर में एक भाजपा विधायक द्वारा भी पुलिसकर्मियों पर कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने और छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। पुलिस आयुक्त ने मामले में निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था। ऐसे में मलपुरा के इस मामले में सामने आए कथित वसूली के आरोपों ने पुलिस की जवाबदेही को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रभारी मंत्री के सामने भी उठ चुका है भ्रष्टाचार का मुद्दा
आगरा में भ्रष्टाचार को लेकर जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रभारी मंत्री के सामने शिकायतें रखे जाने की बात भी सामने आई है। 14 सितंबर को प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। ऐसे में अब मलपुरा के इस मामले में पुलिस पर लगे कथित वसूली और लापरवाही के आरोपों की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, इस मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब इन सवालों के जवाब जरूरी
जन्मदिन मना रहे युवकों को पुलिस किस आधार पर चौकी पर लाई थी?
क्या युवकों को छोड़ने के लिए वास्तव में रुपये लिए गए?
छह हजार रुपये लेने का दावा करने वाले युवक से पुलिस ने पूछताछ की या नहीं?
शिवम आखिरी बार पुलिसकर्मियों के सामने कब और किस स्थिति में था?
चौकी और आसपास लगे सीसीटीवी में क्या रिकॉर्ड हुआ?
सिर पर लगी चोट कैसे आई?
कवर किए गए नाले में शिवम कैसे पहुंचा?
लापता होने के बाद उसकी तलाश में पुलिस ने कौन-कौन से कदम उठाए?
क्या चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच होगी?
इन सवालों का जवाब सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल की फोरेंसिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान से मिल सकता है। फिलहाल परिवार ने पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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