आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में सफल सर्जरी: चिकित्सकों ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक से 40 वर्षीय मरीज की किडनी का ट्यूमर निकाला, स्वस्थ हिस्सा बचाया

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आगरा: किडनी में ट्यूमर (गांठ) होने की बात सामने आते ही आमतौर पर मरीजों और उनके परिवारों के मन में पूरी किडनी गंवाने का डर और महंगे इलाज का भारी-भरकम बोझ समा जाता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के ताजनगरी स्थित एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) के डॉक्टरों ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बेहतरीन मिसाल पेश की है।

संस्थान के विशेषज्ञों ने एक 40 वर्षीय मरीज की किडनी में मौजूद ट्यूमर का सफल ऑपरेशन कर न केवल उसकी जान बचाई, बल्कि पूरी किडनी निकालने के बजाय उसके स्वस्थ हिस्से को भी सुरक्षित रखने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह पूरी प्रक्रिया लैप्रोस्कोपिक असिस्टेड पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी (Laparoscopic Assisted Partial Nephrectomy) तकनीक के जरिए पूरी की गई।

प्राइवेट अस्पतालों में खर्च होना था 6 लाख रुपये, एसएनएमसी में मिली राहत

​इस सफल इलाज के पीछे एक और संघर्षपूर्ण पहलू यह था कि पीड़ित मरीज ने पहले किसी अन्य निजी या उच्च संस्थान में परामर्श लिया था, जहां उसके इलाज पर लगभग छह लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया था और साथ ही बेहतर इलाज के लिए दिल्ली जाने की सलाह दी गई थी। गंभीर आर्थिक चुनौतियों और महंगे खर्च के दबाव के बीच मरीज ने एसएन मेडिकल कॉलेज का रुख किया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने फौरन मोर्चा संभाला और अत्याधुनिक सर्जिकल प्रक्रिया के जरिए उसे नया जीवन दिया।

​पूरी किडनी बचाने के लिए अपनाई गई ‘पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी’ तकनीक

​चिकित्सकों के अनुसार, हर मामले में पूरी किडनी निकालना जरूरी नहीं होता। यदि ट्यूमर का आकार सीमित हो और उसकी स्थिति अनुकूल हो, तो पार्शियल नेफ्रेक्टॉमी तकनीक के जरिए केवल प्रभावित या कैंसरग्रस्त हिस्से को ही काटकर बाहर निकाला जाता है, जिससे किडनी का बाकी स्वस्थ हिस्सा अपनी सामान्य कार्यक्षमता बनाए रखता है। इस केस में भी इसी आधुनिक और जटिल तकनीक का उपयोग किया गया।

​सर्जिकल टीम का नेतृत्व कर रहे डॉ. विजय त्यागी ने बताया कि आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के बेहतरीन तालमेल से अब एसएन मेडिकल कॉलेज में जटिल से जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक अंजाम दिए जा रहे हैं, जिससे मरीजों को बड़े शहरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल रही है। वहीं, डॉ. अभिषेक पाठक ने स्पष्ट किया कि ट्यूमर की स्थिति का आकलन करने के बाद ही इस तरह के मामलों में स्वस्थ किडनी को बचाने का निर्णय लिया जाता है।

​इस सफल ऑपरेशन में सर्जिकल टीम के अलावा एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. अतिहर्ष मोहन, डॉ. प्रभा और डॉ. अमिता त्यागी की टीम ने भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

​आम जनता को मिल रहा है गुणवत्तापूर्ण और सुलभ इलाज

​एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने इस शानदार सफलता पर पूरी मेडिकल टीम को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य आम और जरूरतमंद मरीजों को किफायती, आधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकारी चिकित्सा संस्थानों में भी बड़े और जटिल इलाज अब पूरी तरह संभव हैं।

Dr. Bhanu Pratap Singh