उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में आस्था और उल्लास के पर्व ‘शारदीय नवरात्रि’ की तैयारियां जोरों पर हैं। आगामी 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे इस पावन पर्व के दौरान अगले नौ दिनों तक भक्तजन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधि-विधान से आराधना करेंगे। नवरात्रि का यह पवित्र उत्सव परिवारों में सुख, समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना का केंद्र होता है। पर्व के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि को घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ ही मां की आराधना का सिलसिला शुरू हो जाता है।
इस विशेष अवसर पर पूजा घर को खूबसूरती से सजाकर माता रानी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है, कलश पूजन होता है, परंपरा के अनुसार जौ बोए जाते हैं और कई घरों में नौ दिनों तक अखंड ज्योति भी प्रज्वलित की जाती है। यदि आप भी इस नवरात्रि मां दुर्गा की पूजा करने की पूरी तैयारी कर रहे हैं, तो पूजन से जुड़ी सभी आवश्यक सामग्री पहले ही एकत्रित कर लें, जिससे अनुष्ठान में कोई बाधा न आए।
मां दुर्गा की आराधना के लिए आवश्यक पूजन सामग्री
माता रानी की पूजा और घटस्थापना के लिए आपको निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होगी:
प्रमुख प्रतिमा और वस्त्र: मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा, भगवान गणेश की प्रतिमा, पूजा की चौकी और आसन, चौकी पर बिछाने के लिए लाल कपड़ा, माता रानी के लिए लाल चुनरी, और कलावा या मौली।
श्रृंगार और प्रसाद: फूल और फूलों की माला, श्रृंगार की संपूर्ण सामग्री, मौसमी फल और सात्विक प्रसाद।
पुस्तक व अन्य वस्तुएं: दुर्गा सप्तशती की पुस्तक, जटा वाला नारियल, धूप और अगरबत्ती, दीपक, रुई की बाती, शुद्ध घी, आरती की थाली और घंटी।
पवित्र और हर्बल वस्तुएं: पान के पत्ते और साबुत सुपारी, कुमकुम, चंदन, हल्दी, अक्षत (साबुत चावल), जल के लिए छोटा पात्र, कपूर, अष्टदल कमल बनाने के लिए हल्दी-कुमकुम से रंगे हुए चावल।
घटस्थापना और कलश स्थापना के लिए सामग्री
कलश स्थापना के लिए मिट्टी या तांबे का कलश, शुद्ध जल, एक सिक्का, अक्षत, नारियल, आम के पत्ते, दो साबुत सुपारी, दो इलायची, हल्दी की एक गांठ, लाल कलावा या मौली, दो साबुत लौंग और नारियल पर बांधने के लिए छोटी लाल चुनरी की जरूरत होती है।
जौ बोने के लिए आवश्यक वस्तुएं
यदि आपके परिवार में परंपरा के अनुसार नवरात्रि में जौ बोए जाते हैं, तो इसके लिए मिट्टी का एक चौड़ा और बड़ा पात्र, साफ उपजाऊ मिट्टी, जौ के दाने, गेहूं के दाने (यदि आपकी परंपरा में शामिल हों), थोड़ा सा पानी और कलावा अपने पास रखें।
नवरात्रि पूजा की सरल विधि
पूजा स्थल तैयार करें: घर के किसी शांत और साफ स्थान पर चौकी स्थापित करें। उस पर लाल कपड़ा बिछाकर सभी पूजन सामग्री को व्यवस्थित रूप से रख लें।
प्रतिमा स्थापित करें: चौकी पर थोड़े से अक्षत रखकर माता रानी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें और उनके दाहिने तरफ भगवान गणेश की प्रतिमा रखें।
घटस्थापना करें: कलश में शुद्ध जल भरकर उसमें सिक्का, अक्षत और अन्य निर्धारित सामग्री डालें। कलश के मुख पर आम के पत्ते सजाएं और ऊपर लाल चुनरी से लिपटा हुआ नारियल रखें। अपने पंचांग और स्थानीय परंपरा के अनुसार शुभ मुहूर्त में घटस्थापना करें।
जौ बोएं: मिट्टी के बड़े पात्र में साफ मिट्टी भरकर उसमें जौ के दाने बोएं। हल्का पानी छिड़ककर इस पात्र को पूजा स्थल के समीप रख दें।
दीपक प्रज्वलित करें: पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं। यदि आप अखंड ज्योति जला रहे हैं, तो उसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखें और अग्नि सुरक्षा का विशेष ध्यान दें।
तिलक और पूजन: गणेश जी, मां दुर्गा, कलश और दीपक को हल्दी, कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं। इसके बाद फूल, माला, चुनरी और श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
भोग और आरती: माता रानी को अपनी श्रद्धा के अनुसार फल, मिश्री या अन्य सात्विक चीजों का भोग लगाएं। इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें, मंत्रों का जाप करें और अंत में विधि-विधान से माता की आरती करके परिवार की मंगलकामना करें।
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