यूपी विधान परिषद चुनाव के नतीजे घोषित: 11 में से 6 सीटों पर बीजेपी और 5 पर सपा का कब्जा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव परिणामों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। 27 अक्टूबर से जारी मतगणना के दौरान भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। उपलब्ध परिणामों के मुताबिक, छह सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और पांच सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की है। हालांकि, वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना और परिणाम की घोषणा को लेकर विवाद बना हुआ है। सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा की बढ़त के बीच भाजपा कार्यकर्ताओं ने मतगणना में धांधली का आरोप लगाते हुए धरना दिया है।

इन नतीजों को लेकर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जनता के बदलते रुझान का संकेत बता रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि इन चुनावों में प्रत्याशियों की व्यक्तिगत लोकप्रियता और मेहनत की अहम भूमिका रही है। भाजपा नेताओं ने परिणामों की समीक्षा किए जाने की बात भी कही है।

वाराणसी स्नातक सीट पर सबसे बड़ा सियासी घमासान

वाराणसी स्नातक एमएलसी सीट पर मतगणना सबसे अधिक चर्चा में है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 14वें राउंड तक समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा को 51,035 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को 33,757 मत प्राप्त हुए थे। इस तरह दोनों के बीच 17,278 मतों का अंतर सामने आया।

केदारनाथ सिंह ने मतगणना के दौरान ही अपनी हार स्वीकार करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि वह जनादेश को पूरी विनम्रता और लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बावजूद समर्थकों के स्नेह, सहयोग और विश्वास को अपने लिए अमूल्य बताया।

दूसरी ओर, वाराणसी में भाजपा कार्यकर्ताओं के धरने और मतगणना में गड़बड़ी के आरोपों ने चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है। सपा प्रत्याशी की बढ़त के बीच अंतिम परिणाम की आधिकारिक घोषणा पर सबकी निगाहें टिकी हैं। 14वें राउंड के आंकड़ों को अंतिम परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।

आगरा में भाजपा और सपा, दोनों को मिली जीत

आगरा खंड की दोनों विधान परिषद सीटों पर भाजपा और सपा ने एक-एक सीट जीतकर मुकाबले को बराबरी पर रखा।

आगरा स्नातक सीट: भाजपा प्रत्याशी डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ‘गुरुजी’ ने 42,743 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की। इस जीत को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगरा शिक्षक सीट: समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने 14,046 मत हासिल कर जीत दर्ज की। शिक्षक सीट पर सपा की जीत भाजपा के लिए झटका मानी जा रही है।

आगरा की दोनों सीटों के नतीजे बताते हैं कि अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं का रुझान अलग रहा। जहां स्नातक सीट पर भाजपा अपना प्रभाव बनाए रखने में सफल रही, वहीं शिक्षक सीट पर सपा ने जीत हासिल की।

11 सीटों पर किसने मारी बाजी

उपलब्ध परिणामों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की विधान परिषद की 11 सीटों पर दलवार स्थिति इस प्रकार है:

मेरठ स्नातक: भाजपा के दिनेश कुमार गोयल — 24,929 मत।

आगरा स्नातक: भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह — 42,743 मत।

इलाहाबाद-झांसी स्नातक: सपा के डॉ. मान सिंह यादव — 60,358 मत।

लखनऊ शिक्षक: भाजपा के उमेश द्विवेदी — 13,179 मत।

वाराणसी शिक्षक: सपा के लाल बिहारी यादव — 11,612 मत।

आगरा शिक्षक: सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल — 14,046 मत।

मेरठ शिक्षक: भाजपा के श्रीचंद शर्मा — 18,099 मत।

बरेली-मुरादाबाद शिक्षक: भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लों — 21,672 मत।

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक: भाजपा के ध्रुव कुमार त्रिपाठी — 16,790 मत।

लखनऊ स्नातक: सपा की कांति सिंह।

वाराणसी स्नातक: सपा के आशुतोष सिन्हा बढ़त पर, अंतिम परिणाम की आधिकारिक घोषणा का इंतजार।

इन आंकड़ों के मुताबिक भाजपा ने छह सीटों पर और सपा ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की है। वाराणसी स्नातक सीट की स्थिति को लेकर जारी विवाद के कारण चुनाव परिणामों की अंतिम तस्वीर पर राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।

भाजपा बोली-प्रत्याशियों की व्यक्तिगत मेहनत से मिली जीत

विधान परिषद चुनाव के नतीजों पर भाजपा की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि इन परिणामों को सीधे तौर पर विधानसभा चुनाव के जनादेश से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। राज्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के छह प्रत्याशी जीते हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के खाते में चार सीटें गई हैं। उन्होंने कहा कि सपा को इन परिणामों से बहुत अधिक खुश नहीं होना चाहिए, क्योंकि यह उसकी नीतियों की जीत नहीं है। उनके मुताबिक, जिन प्रत्याशियों ने अपने व्यक्तिगत प्रभाव, मतदाताओं से संपर्क और अतिरिक्त मेहनत के दम पर समर्थन जुटाया, उन्हें सफलता मिली। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने भी चुनाव परिणामों की समीक्षा किए जाने की बात कही है। इससे साफ है कि भाजपा इन नतीजों को केवल जीत-हार के आंकड़ों के तौर पर नहीं, बल्कि संगठन और प्रत्याशियों के प्रदर्शन के लिहाज से भी देख रही है।

सपा का दावा-2027 में बदलाव का संकेत

समाजवादी पार्टी इन परिणामों को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले अपने पक्ष में बने माहौल के रूप में पेश कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नतीजे भाजपा के प्रति मतदाताओं के भरोसे में कमी और अखिलेश यादव के नेतृत्व के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं। सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने कहा, “प्रभु का आशीर्वाद समाजवादियों के साथ है। पहले अयोध्या, अब काशी, मथुरा और प्रयागराज भी जीते।”

फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी परिणामों को सपा के बढ़ते जनसमर्थन का संकेत बताया। उन्होंने दावा किया कि लोगों के मन में बदलाव की भावना है और 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, विधान परिषद चुनावों के मतदाता और उनकी चुनावी परिस्थितियां विधानसभा चुनावों से अलग होती हैं। इसलिए इन नतीजों को 2027 के चुनाव का सीधा पूर्वानुमान मानने के बजाय राजनीतिक दलों के प्रदर्शन के एक संकेत के तौर पर देखना अधिक उचित होगा।

कांग्रेस ने भी भाजपा पर साधा निशाना

विधान परिषद चुनाव के परिणामों पर कांग्रेस ने भी भाजपा को घेरा है। कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का सफाया होने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि चुनाव ईमानदारी से कराए गए होते, तो इंडिया गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी सभी 11 सीटों पर जीत दर्ज कर सकती थी। वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इन चुनावों को जनता के मूड का वास्तविक पैमाना मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि एमएलसी चुनाव जनता के व्यापक जनादेश को नहीं दर्शाते और इनके आधार पर देश या प्रदेश की राजनीतिक दिशा का आकलन नहीं किया जा सकता।

विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल

उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक दावों को और तेज कर दिया है। छह सीटें जीतकर भाजपा ने बढ़त बनाए रखी, जबकि पांच सीटों पर जीत के साथ सपा ने भी अपनी मौजूदगी मजबूती से दर्ज कराई। खास तौर पर आगरा में दोनों दलों का एक-एक सीट जीतना और वाराणसी स्नातक सीट पर सपा प्रत्याशी की बढ़त चर्चा का केंद्र बनी हुई है। अब सबसे अहम सवाल वाराणसी स्नातक सीट के अंतिम परिणाम और मतगणना विवाद के समाधान का है। इसके बाद ही सभी 11 सीटों के नतीजों की औपचारिक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल भाजपा परिणामों की समीक्षा की बात कर रही है, जबकि सपा इसे 2027 की राजनीतिक लड़ाई से पहले अपने लिए उत्साहजनक संकेत बता रही है।

Dr. Bhanu Pratap Singh