उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लिया है। सीएम योगी ने कहा है कि प्रदेश सरकार ओबीसी आरक्षण के लिए आयोग का गठन करेगी, इसके बाद ही निकाय चुनाव कराए जाएंगे। अगर जरूरी हुआ तो सरकार हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएगी।
इससे पहले हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अपने 70 पेज के फैसले में कहा कि यूपी सरकार चाहे तो बगैर ओबीसी आरक्षण चुनाव करा सकती है। हाईकोर्ट का कहना है कि यूपी सरकार ने ओबीसी आरक्षण को लेकर जो ड्राफ्ट नोटिफिकेशन लगाया है, उसमें सुप्रीम कोर्ट की तरफ से निर्धारित ट्रिपल टेस्ट का पालन नहीं किया गया है। यूपी सरकार पहले ओबीसी आरक्षण के लिए कमीशन बनाए।
केशव मौर्या और एके शर्मा ने भी स्पष्ट किया सरकार का रुख
हाई कोर्ट के फैसले के बाद यूपी के डेप्युटी सीएम केशव मौर्या ने भी ट्वीट कर सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। केशव मौर्या ने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव के संबंध में हाई कोर्ट के आदेश का विस्तृत अध्ययन कर विधि विशेषज्ञों से परामर्श के बाद सरकार के स्तर पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। परंतु पिछड़े वर्ग के अधिकारों को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसी तरह योगी सरकार के मंत्री एके शर्मा का भी कहना है कि बिना ओबीसी आरक्षण यूपी में निकाय चुनाव नहीं कराए जाएंगे। हमारी सरकार ओबीसी आरक्षण के पक्ष में पूरी तरह है।
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