नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) को लेकर मचे शोर-शराबे के बीच चुनाव आयोग ने मंगलवार को जनता की अदालत का रुख करते हुए देश के हरेक नागरिक से पांच सवाल पूछे हैं और विशेष पुनरीक्षण कार्य में सहयोग मांगा है।
आयोग की तरफ से जारी किए गए इन सवालों का मकसद मतदाता सूची को शुद्ध, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें। आयोग ने लोगों से कहा है कि अगर वे आयोग के सवालों से सहमत हैं तो इस विशेष पुनरीक्षण कार्य में सहयोग करें।
निर्वाचन आयोग ने भारत के नागरिकों से मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर पांच अहम सवाल पूछे हैं.
पहला सवाल है कि क्या मतदाता सूची की गहन जाँच होनी चाहिए ?
दूसरा सवाल है कि मृतकों के नाम मतदाता सूची से हटाये जाने चाहिए या नहीं ?
तीसरा सवाल कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में दो या इससे अधिक जगह पर हैं, उनके नाम एक ही जगह पर होने चाहिए या नहीं ?
चौथा सवाल है कि जो लोग दूसरी जगह जा बसे हैं, उनके नाम हटाने चाहिए या नहीं ?
पांचवा और अंतिम सवाल है कि विदेशियों के नाम हटाने चाहिए या नहीं?
चुनाव आयोग ने ये भी कहा कि अगर नागरिकों का उत्तर “हाँ” में है, तो फिर चुनाव आयोग को मतदाता सूची को शुद्ध बनाने के इस कठिन कार्य को सफल बनाने में नागरिक अपना सहयोग दें।
राजनीतिक दलों ने दर्ज कराईं 10 आपत्तियां
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बिहार SIR में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बावजूद अब तक राजनीतिक दलों की ओर से सिर्फ दस आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं, जबकि उन 12 दलों के पास एक लाख 61 हजार बूथ लेवल एजेंट हैं. तो वहीं, आम नागरिक और मतदाताओं ने लाखों की तादाद में संशोधन के लिए आवेदन किए हैं.
आयोग ने कहा कि बिहार में SIR के तहत मतदाता सूची के संशोधन में लोगों के नाम हटाने और योग्य मतदाताओं के नाम शामिल करने का आवेदन देने के लिए सिर्फ पांच दिन बचे हैं. पर राजनीतिक दल आपत्तियां दर्ज कराने में नदारद रहे हैं.
निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना पूर्व सूचना, सुनवाई और तर्कपूर्ण आदेश के हटाया नहीं जाएगा. आयोग ने ये भी स्पष्ट किया है कि ये प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष है, जिसमें बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) और 1.60 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) शामिल हैं.
दरअसल, चुनाव आयोग ने बिहार में 24 जून को SIR प्रक्रिया शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची को अद्यतन और शुद्ध करना है. 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में 7.24 करोड़ मतदाता शामिल हैं, जबकि लगभग 65 लाख नाम हटाए गए हैं. इनमें 22 लाख मृत मतदाता, 7 लाख डुप्लिकेट नाम और 36 लाख ऐसे लोग शामिल हैं जो स्थायी रूप से बिहार से बाहर चले गए हैं या जिनका पता नहीं चल सका.
-SHABD
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