डॉ. भानु प्रताप सिंह
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Agra, Uttar Pradesh, India, Bharat. आगरा से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल साहित्यप्रेमी हैं। वे पुलिस विभाग में दरोगा रहे। अब राजनीति के शिखर पर हैं। कविताएं लिखते हैं। उनकी कविताओं में समाज की विद्रूपता का वर्णन होता है। कविजनों के प्रति असम्मान बर्दाश्त नहीं है। एक कवि सम्मेलन में जब श्रोता ने कवि को हूट किया तो प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने उसे रिवाल्वर दिखाकर डराया था।
यह घटना सूरसदन की है। कवि सम्मेलन में अदम गौंडवी आए थे। उनका असली नाम राम नाथ सिंह है। वे गोंडा जिले के रहने वाले थे। किसानी करते थे। इसलिए साधारण वेशभूषा थी। उन्हें देखकर कोई कह नहीं सकता था कि ये बहुत बड़े कवि हैं। उन्होंने दलितों और गरीब लोगों की दुर्दशा पर केंद्रित कविताएं लिखीं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कविताए हैं- तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मैं चमारों की गली तक ले चलूंगा आपको, काजू भुने पलेट में, व्हिस्की गिलास में…।
जब अदम गौंडवी को कविता पाठ के लिए बुलाया गया तो उन्हे देखकर कुछ श्रोता हूटिंग करने लगे। गांव की वेशभूषा वाले के साथ यही होती है। कवि सम्मेलन में प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल भी थे। उन्होंने जब देखा कि हूटिंग करने वाले शांत नहीं हो रहे हैं तो उन्होंने एक श्रोता को इशारा करके कमर में लगी रिवाल्वर दिखा दी। इस पर वह शांत हो गया। जब अदम गौंडवी ने काव्य पाठ किया तो हर कई वाह-वाह करता रहा।
यह किस्सा प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषाविज्ञान विद्यापीठ में ‘सृजनात्मक लेखन व आज के युवा’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में सुनाया। कार्यशाला में नवांकुर कवयित्री रुद्रा रघुवंशी की प्रथम पुस्तक ‘50 Shades of लव’ का विमोचन किया गया।
उन्होंने कहा- विश्व की पहली कविता हमारे यहां ही लिखी गई। संभोगरत क्रौंच पक्षी की शिकारी ने हत्या कर दी तो महर्षि वाल्मीकि के मुख से पहली कविता निकली। आज के कवि ग्लोबल वार्मिंग, ग्रीन गैस, वॉटर हार्वेस्टिंग पर भी कविता लिख रहे हैं।
प्रो. बघेल ने बताया कि हिंदी कवि मुख्यतः पुलिस, पाकिस्तान, पॉलिटिक्स पर कविताएं लिखते हैं। कविगण मंच पर मंदिर मस्जिद पर कविता लिखते रहे और मंदिर बनाना हमें पड़ा। कश्मीर पर लिखी गईं कविताएं खत्म हो गई हैं। अयोध्या और काशी का मुद्दा समाप्त हो गया है। तीसरे कार्यकाल में भी बहुत से मुद्दे खत्म हो जाएंगे। इस तरह मोदी सरकार में हिंदी कवियों के सामने बड़ा संकट आने वाला है। इस तरह उन्होंने इशारा किया कि पॉलिटिक्स और पाकिस्तान भी हिंदी कवियों के लिए कविता के विषय नहीं रहेंगे।
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