कोई भी पति-पत्नी, कपल Therapy के लिए यह सोचकर नहीं आते कि उन्हें अपना रिश्ता सुधारने के लिए खुद में कुछ बदलाव करने होंगे बल्कि यह सोचकर आते हैं कि कपल Therapy से उनके पार्टनर में बदलाव होगा।
एक दशक तक मैरेज कांउसलर का काम करने वाले पीटर पियरसन ने अपने करियर के इतने सालों में कभी नहीं देखा कि किसी व्यक्ति ने कहा हो, ‘मैं अपनी पत्नी को समय नहीं दे पाता’, ‘मैं घर का कोई काम नहीं करता’, ‘मैं टीवी, मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करता हूं’ या फिर ‘मैं यहां इसलिए हूं ताकि अपने वैवाहिक रिश्ते को बचा सकूं।’बल्कि उन्होंने ज्यादातर सुना है, ‘मेरी पत्नी हर वक्त चिल्लाती है, शिकायत करती है कि मैं उसे खुश करने के लिए कुछ नहीं करता।’ या ‘मैं कुछ भी करूं वह कभी खुश नहीं होती।’
पियरसन कहते हैं कि उनके पास दिनभर में कई लोग आते है जो यही राग अलापते हैं कि कैसे उनके पार्टनर ने उन्हें तकलीफ पहुंचाई है, उनके साथ गलत किया है। कहने की जरुरत नहीं कि यह तय करने का काम पियरसन का है कि गलत कौन है और वैवाहिक रिश्ते को ठीक रखने के लिए किसे अधिक बदलाव की जरूरत है पर हर बार ‘मेरे पार्टनर से मुझे तकलीफ है’ यही सोच होती है।
कपल Therapy के दौरान पियरसन उनकी इस सोच को मोड़ कर नया रुख देते हैं। वह कहतें हैं, ‘आपका पार्टनर आपको दुख नहीं देता, आप अपने पार्टनर के किसी काम या बात पर कैसे रिएक्ट करते हैं यह आपके दुख का कारण बनता है।’
पियरसन के हिसाब से बदलाव से बचा नहीं जा सकता। शादी के रिश्ते में अक्सर पति-पत्नी बदलाव से कतराते हैं। उन्हें इस बात का भी डर होता है कि उनके पार्टनर उन्हें बदलना चाहते हैं और बिना बदलाव उनको स्वीकार नहीं करेंगे। हालांकि हर व्यक्ति अपने पार्टनर के स्वभाव को बदलने का इच्छुक है लेकिन समस्याओं की जड़ होने के बाद भी हम अपनी ही किसी आदत को बदलने के लिए तैयार नहीं होते। यही पति-पत्नी के बीच की भी मूल समस्या है जिसका समाधान खुद उन्हें ही करना होगा।
-एजेंसी
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