पुनर्जागरण के महान चित्रकार लियोनार्डो दा विंची की कृति Monalisa को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। अब नई रिसर्च के हवाले से कहा जा रहा है कि यह महान कलाकार अपनी कृति Monalisa को पूरी नहीं कर पाए थे क्योंकि उनके शरीर का दाहिना हिस्सा स्ट्रोक के कारण कमजोर पड़ गया था।
लियोनार्डो दा विंची के कालजयी कृति Monalisa के बारे में एक नई रिसर्च स्टडी सामने आई है। नई रिसर्च के अनुसार पुनर्जागरण काल के महान कलाकार शायद अपनी कृति पूरा नहीं कर पाए थे क्योंकि उनके शरीर का दाहिना हिस्सा स्ट्रोक के कारण प्रभावित हो गया था। हालांकि, उन्होंने अपने बाएं हाथ की मदद से इस पेंटिंग को अंतिम रूप दे सके, लेकिन इस दौरान वह काफी दर्द में रहे होंगे। ऐसा माना जाता है कि लियोनार्डो अपने दाहिने हाथ से ही पेटिंग करते थे और बीमारी के कारण उनका कई काम अधूरा ही रह गया।
अभी तक की जानकारी के अनुसार माना जाता है कि लियोनार्डो अपने आखिरी दिनों में बड़े स्ट्रोक के शिकार हुए थे जिसके कारण उनके शरीर का दाहिना हिस्सा काफी प्रभावित हुआ था। शरीर के दाहिने हिस्से के कमजोर पड़ने के कई प्रमाण जैविक तौर पर और उनके बनाए चित्रों के अध्ययन से भी मिलते हैं। उनके बनाए चित्रों को देखकर ऐसा लगता है कि दाहिने हिस्से के कमजोर पड़ने का असर प्लेटर और ब्रश के प्रयोग में भी नजर आता था।
जरनल ऑफ द रॉयल सोसाइटी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार लियोनार्डे दा विंची के कुछ पोर्ट्रेट को देखकर ऐसा लगता है कि हादिने हाथ के निचले हिस्से को शायद कपड़े की पट्टी जैसी किसी चीज से बांधकर (गले में लटकाते हुए) उन्होंने इसे पूरा किया हो। लेख के सह-लेखक डॉक्टर डेविड लजेरी प्लास्टिक रीकंस्ट्रक्टिव अस्थेटिक सर्जन हैं की भी कुछ ऐसी ही राय है। उनका कहना है, ‘तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है कि कुछ वैकल्पिक तरीके का इस्तेमाल किया गया जिसे आम तौर पर नकली हाथ कहा जाता है।’
डॉक्टर लजेरी कहते हैं कि शायद यही वजह है कि अपने जीवन के आखिरी 5 सालों में उन्होंने कोई कृति नहीं बनाई। वह एक शिक्षक के तौर पर छात्रों को ट्रेनिंग देते रहे लेकिन खुद कोई निर्माण कार्य नहीं किया।
-एजेंसियां
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