लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्ता के गलियारों में जातिगत समीकरणों को साधने की होड़ मची है। इसी कड़ी में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने ब्राह्मण समाज को लुभाने के लिए एक बड़ा सियासी दांव खेल दिया है।
मायावती ने दावा किया है कि ब्राह्मण समाज का हित केवल बसपा में ही सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि जब से बसपा ने ब्राह्मण समाज को उम्मीदवार बनाना शुरू किया है, तब से विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी में बेचैनी बढ़ गई है।
सोमवार को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी बात रखते हुए मायावती ने लिखा, “बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों के मद्देनज़र जब से अपरकास्ट समाज और उसमें से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को, उनके बी.एस.पी. में जुड़ने को ध्यान में रखकर, पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है, तब से सभी विरोधी पार्टियों में व ख़ासकर समाजवादी पार्टी में उनकी नींद उड़ा देने वाली बेचैनी देखने को मिल रही है, जो कि सन् 2007 की तरह ब्राह्मण समाज के योगदान से बी.एस.पी को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जैसा ही इस बार के आगामी चुनाव परिणाम के रिपीट होने की संभावना के तहत् स्वाभाविक ही प्रतीत होता है।”
ब्राह्मण समाज का हित बी.एस.पी. में ही सुरक्षित: मायावती
बसपा प्रमुख ने आगे लिखा, “वैसे भी यह सर्वविदित है कि यूपी जैसे विशाल आबादी वाले प्रदेश में अपरकास्ट में से ख़ासकर ’ब्राह्मण समाज का हित बी.एस.पी. में ही सुरक्षित है’, जिस अपनी इस ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त, नीयत व नीति को बहुजन समाज पार्टी ने पहले पार्टी स्तर पर अमल करके और फिर सरकार बनने पर भी उन्हें भरपूर आदर-सम्मान के साथ-साथ उन्हें हर स्तर पर पूरी-पूरी भागीदारी देकर यह साबित भी कर दिया है, जबकि दूसरी पार्टियों की सरकारों में इस वर्ग के लोग पिछले काफी समय से अपने आपको काफी उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं।”
बसपा अपरकास्ट को जरूर देगी टिकट
पूर्व सीएम ने ऐलान करते हुए लिखा, “इतना ही नहीं बल्कि ’ब्राह्मण समाज द्वारा सामाजिक भाईचारा के आधार पर बी.एस.पी. से जुड़ने की इनकी तैयारियों को ध्यान में रखकर इन्हें पार्टी उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया जारी है तथा इन्हें बी.एस.पी. की आयरन लेडी नेतृत्व पर पूरा यह यक़ीन भी है कि बी.एस.पी. की सरकार बनने पर उन्हें पहले की तरह ही हर स्तर पर भरपूर आदर-सम्मान ज़रूर दिया जायेगा, जो कि इनकी वास्तविक चिन्ता व दूसरी पार्टियों से मुँह मोड़ने का कारण है।
इसके साथ ही, अपरकास्ट में से क्षत्रिय, वैश्य आदि व अन्य समाज के लोगों को भी उनकी बी.एस.पी. से जुड़ने की तैयारी अर्थात् ’जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी भागीदारी’ के आधार पर चुनाव में उम्मीदवार भी ज़रूर बनाया जायेगा, जिसकी तैयारी हर स्तर पर लगातार जारी है।”
उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए लिखा, “बी.एस.पी., दूसरी पार्टियों की तरह कुछ लोगों को ’लॉलीपाप’ थमाने की संकीर्ण व स्वार्थ की राजनीति नहीं करती है बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण की चिन्ता करना अपना संवैधानिक कर्तव्य समझती है और इसीलिये बी.एस.पी. की नीति व कार्यक्रम जनहित व जनकल्याण तथा अपराध नियंत्रण व क़ानून व्यवस्था के मामले में भी देश व जनहित में बेहतरीन होते हैं।”
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