डॉ. भानु प्रताप सिंह
मुंह खोल, कुछ बोल। कुछ भी मांग, रुपये या भांग। सब कुछ मिलेगा, दिल खिलेगा। तू बुलाएगा, वो सिर के बल चला आएगा। माता के बुलाने पर भक्त भले ही न आए पर वो आएगा, चरणों में लोट जाएगा। अब तू ही माता, तू ही पिता है, तू ही बंधु, तू ही सखा है। अब तेरी चांदी है, प्रत्याशी तो बांदी है।
इसलिए मुंह मत सिल, प्रत्याशी पर पिल। अगर तू बंदूक मँगवाएगा, वो तोप दिलाएगा। सड़क बनवा ले, हैंडपंप भी लगवा ले। नाली साफ करवा ले, नाले की सिल्ट निकलवा ले। मोहल्ले की सफाई करवा ले और चाहे तो घर में पौंछा भी लगवा ले। वो नाक भी पौंछने आएगा जो वोट तेरा चाहेगा। सो काम करवा ले, अभी के अभी बुला ले। अब तो तेरी चांदी है, प्रत्याशी तो बांदी है।
पिछली बातें भूल जा, हो थोड़ा कूल जा। घर में कोई फंक्शन करवा ले, सभी प्रत्याशियों को बुलवा ले। फिर लिफाफे पकड़, ऊपर से अकड़। वो मन ही मन कुढ़ेगा पर हैं-हैं करेगा। चरणों में पड़ेगा, वोट के लिए अड़ेगा। दूर हो गया शनि का साया है, तेरा अच्छा समय आया है। इसलिए कोई मुरव्वत नहीं, फोकट में किसी से मोहब्बत नहीं। वो चुनाव बाद नजर नहीं आएगा, वोटर ढूंढता रह जाएगा। इसलिए जो करना है अभी करना है क्योंकि फिर पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। अब तो तेरी चांदी है, प्रत्याशी तो बांदी है।
हालांकि जल्दी का काम शैतान का होता है लेकिन चुनाव में तो हर काम जल्दी में ही होता है। जो इंतजार करता है वह इंतजार ही करता रहता है। इस बार मौके का फायदा नहीं उठाएगा तो पूरे पांच साल पछताएगा। सो उठ, जाग और लक्ष्य को प्राप्त कर, सपनों को आप्त कर। जो तेरी बात न माने उसे वोट का टुकड़ा डाल, फिर देख उसका हाल। वो दुम हिलाता हुआ पीछे-पीछे आएगा, लार टपकाएगा। लेकिन जरा सावधान। रहीमदास जी कह गए हैं न..
रहिमन ओछे नर ते बैर करहु ना प्रीत
काटे-चाटे श्वान के दोऊ भांति विपरीत।
चुनाव में दो-चार करोड़ बहाना है, बाद में तो नोट ही नोट कमाना है
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