नोएडा। मतदाता सूची के विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बीच कार्यभार के दबाव ने एक महिला सहायक अध्यापिका को बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) पद से इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। अध्यापिका का इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे बीएलओ ड्यूटी के बढ़ते बोझ पर सवाल उठने लगे हैं।
सेक्टर-94 स्थित गेझा उच्च प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापिका पिंकी सिंह लंबे समय से थायराइड की बीमारी से जूझ रही हैं। इसके साथ ही पारिवारिक समस्याओं ने उनके लिए शिक्षण कार्य और बीएलओ की ड्यूटी को एक साथ निभाना और कठिन बना दिया था।
ड्यूटी हटाने की अपील नहीं सुनी गई
सूत्रों के अनुसार, पिंकी सिंह को सेक्टर-33 स्थित रॉकवुड स्कूल में मतदान केंद्र का बीएलओ नियुक्त किया गया था। विद्यालय की प्रधानाचार्य नीलम सिंह ने बताया कि शिक्षिका ने ड्यूटी लगाए जाने के बाद इसे हटाने की अपील की थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। मजबूरी में उन्होंने बीएलओ पद से इस्तीफा सौंप दिया।
इस्तीफा पत्र में दर्द झलक उठा
महिला अध्यापिका पिंकी सिंह के वायरल हुए इस्तीफे पत्र में लिखा है, मेरा बीएलओ का पार्ट नंबर 206 है. मतदाता स्थल रॉकवुड स्कूल है. मेरे भाग संख्या में 1179 मतदाता हैं. मैंने 215 मतदाताओं का ऑफलाइन डेरा फीड कर दिया है. मैं अब अपने जॉब से इस्तीफा दे रही हूं, क्योंकि अब मुझसे यह काम नहीं हो पाएगा।
पत्र में उन्होंने उल्लेख किया, “अब मुझसे यह कार्य नहीं हो पाएगा। न शिक्षण कार्य हो पाएगा और न ही बीएलओ की जिम्मेदारी।” उन्होंने निर्वाचन सामग्री वापस लेने की भी अपील की है।
SIR अभियान के दौरान मामला बना चर्चा का विषय
गौतमबुद्ध नगर में इन दिनों SIR अभियान तेजी से चल रहा है और प्रशासन लापरवाही बरतने वाले बीएलओ व सुपरवाइजरों पर कार्रवाई कर रहा है। ऐसे में एक महिला अध्यापिका द्वारा कार्यभार के दबाव में इस्तीफा देना इस पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है।
बीमार पड़ रहे बीएलओ
विशेष पुनरीक्षण कार्य का दबाव बढ़ने के साथ ही कई बीएलओ स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने लगे हैं। लगातार फील्ड में रहने और लंबे समय तक काम करने के कारण थकावट, बुखार और ब्लड प्रेशर बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। हार्ट की समस्या से पीड़ित कई शिक्षक आवश्यक दवाइयाँ साथ लेकर ड्यूटी निभाने को मजबूर हैं।
स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित, बीएलओ बने शिक्षक
जिले में करीब तीन हजार शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से 1200 से अधिक को बीएलओ की जिम्मेदारी सौंपी जा चुकी है। इतने शिक्षकों के फील्ड में लगने से कई स्कूलों में कक्षाएं खाली पड़ी हैं। शिक्षकों की अनुपस्थिति में छात्र कक्षा के बाहर भटकते नजर आ रहे हैं और नियमित शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
-साभार सहित
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