25 वर्षों से रिश्तों की अटूट डोर बन रहा ‘माधवी बेटियों का मायका’: आगरा में आयोजित अनूठे उत्सव में झूम उठीं बेटियां

PRESS RELEASE

आगरा। श्रावण मास में बेटियों को मायके का सुख और परिवार का अपनापन देने की अनूठी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए माधवी अग्र महिला मंडल द्वारा “माधवी बेटियों का मायका” कार्यक्रम का आयोजन महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी में किया गया। विगत 25 वर्षों से आयोजित हो रहा यह कार्यक्रम उन अनाथ बेटियों के लिए समर्पित है, जिनका विवाह संस्था द्वारा वर्षों पूर्व कराया गया था। विवाह के बाद उन्हें मायके की कमी महसूस न हो और वे अपने परिवार के बीच उसी अपनत्व का अनुभव कर सकें, इसी उद्देश्य से संस्था ने इस परंपरा की शुरुआत की थी।

कार्यक्रम में 45 बेटियां अपने परिजनों के साथ आमंत्रित थीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुरेश चंद्र गर्ग एवं उद्घाटनकर्ता नीतेश अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद उपस्थित अतिथियों एवं समाजसेवियों ने बेटियों से राखी बंधवाई। सुरेश चंद्र गर्ग, नीतेश अग्रवाल, बीडी अग्रवाल, सुनील विकल, ओम प्रकाश, राम रतन मित्तल, मुरारी प्रसाद अग्रवाल ने बेटियों के साथ भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता को महसूस किया।

इस अवसर पर उद्घाटनकर्ता नीतेश अग्रवाल ने कहा कि “बेटी किसी भी परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उस परिवार की सबसे खूबसूरत जिम्मेदारी और सबसे अनमोल रिश्ता होती है। विवाह के बाद बेटी अपने नए घर चली जाती है, लेकिन उसके मायके का दरवाजा और परिवार का स्नेह उसके लिए हमेशा खुला रहना चाहिए। माधवी अग्र महिला मंडल 25 वर्षों से जिस भावना के साथ इन बेटियों को मायके का सुख दे रहा है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है। हमें बेटियों को केवल कार्यक्रमों में सम्मान देने के बजाय जीवनभर उनका साथ निभाने और उन्हें परिवार का हिस्सा मानने की संस्कृति को मजबूत करना चाहिए। इस आयोजन में राखी बंधवाना मेरे लिए सम्मान नहीं, बल्कि भाई होने का सौभाग्य है।”

संस्था की अध्यक्ष पुष्पा अग्रवाल एवं सचिव ऊषा बंसल ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि उन बेटियों के जीवन में मायके के स्नेह और अपनत्व को जीवंत रखना है। समाजसेवी हर वर्ष इन बेटियों से बहन की तरह राखी बंधवाते हैं, उनके साथ समय बिताते हैं और उन्हें परिवार के सदस्य के रूप में सम्मान देते हुए विदाई करते हैं।

दीप प्रज्ज्वलन एवं राखी कार्यक्रम के बाद सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ। राम दरबार की नृत्य नाटिका की मनोहारी प्रस्तुति से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सावन के झूले, मल्हार और लोकगीतों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। वहीं वृंदावन की मंडली द्वारा प्रस्तुत रासलीलाओं ने उपस्थित लोगों को भक्ति और कृष्ण प्रेम से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर बेटियों के साथ आए बच्चों ने सदस्याओं के लिए नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए जैसे गीतों पर गुदगुदाते अंदाज में प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम का सबसे भावुक और आत्मीय दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मंडल की सदस्याएं इन बेटियों के साथ रातभर कार्यक्रम स्थल पर ही रुकीं। उन्होंने बेटियों का हालचाल जाना, उनसे पारिवारिक जीवन के अनुभव साझा किए और मां की तरह जीवन में आगे बढ़ने की सीख दी। लंबे समय बाद मायके जैसा वातावरण पाकर बेटियों के चेहरों पर खुशी और आत्मीयता साफ झलक रही थी। कहीं मां-बेटी का स्नेह दिखाई दिया तो कहीं भाई-बहन का प्रेम, जिसने पूरे आयोजन को भावनाओं से भर दिया।

कोषाध्यक्ष आभा जैन और मीडिया प्रभारी शिल्पी अग्रवाल ने बताया कि बुधवार सुबह बेटियों के लिए विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। सभी बेटियों को उपहार, त्योहार की मिठाइयां एवं अन्य सामग्री भेंट कर स्नेहपूर्वक विदा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेटियां जब अपने मायके से विदा हों तो उनके साथ केवल उपहार ही नहीं, बल्कि परिवार का प्रेम, आशीर्वाद और यह विश्वास भी जाना चाहिए कि उनका मायका हमेशा उनके साथ है।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि ऊषा अग्रवाल, निर्मल अग्रवाल संरक्षक सदस्य मोहनलाल अग्रवाल,शकुन बंसल (कातिब), सुमन प्रकाश जैन (मुंबई), रजनी अग्रवाल, शशी अग्रवाल, संगीता अग्रवाल सहित कार्यक्रम संयोजिकाएं नमिता गोयल, श्वेता गोयल, श्वेता मित्तल, आदि सदस्य उपस्थित रहीं।

Dr. Bhanu Pratap Singh