आगरा। राज्यसभा सदस्य नवीन जैन ने कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा समय-समय पर दिये गये बयानों से पता चलता है कि वे सनातन के प्रति घृणा का भाव रखते हैं। सनातन संस्कृति का मखौल बनाने वाले अखिलेश यादव की मानसिकता हिंदू-विरोधी है। सनातन के अपमान के लिए अखिलेश यादव को हिंदू समाज से क्षमायाचना करनी चाहिए।
सांसद नवीन जैन ने कहा कि अखिलेश यादव महाकुंभ में 1000 हिंदुओं के लापता होने, हिंदू साधु-संतों की तुलना माफियाओं से करने जैसे सनातन विरोधी बयान पहले ही दे चुके हैं। अब गौशालाओं को दुर्गंध बताने वाला उनका बयान सनातन के प्रति उनकी घृणा का प्रमाण है। जैन ने याद दिलाया कि अखिलेश यादव ही नहीं, उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने भी सत्ता में रहते हुए हमेशा एक वर्ग विशेष की चाटुकारिता की और हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई।
भाजपा सांसद ने कहा कि यह दुर्भाग्य ही है कि स्वयं को श्रीकृष्ण का वंशज कहने वाले अखिलेश यादव को गौशालाओं में दुर्गंध आती है। क्या अखिलेश यह भी भूल गए कि भगवान श्रीकृष्ण ने गायों की सेवा को जीवन का आधार माना था। यह बयान सिर्फ एक वर्ग विशेष के वोट बैंक को खुश करने के लिए दिया गया, जो सपा की तुष्टिकरण नीति का परिचायक है।
श्री जैन ने अखिलेश के इस बयान की भी आलोचना की कि सीएम योगी को नहीं पता कि नवदुर्गा आ रहे हैं। अखिलेश शायद नहीं जानते कि सीएम योगी तो मुख्यमंत्री आवास में नवरात्रि में कन्या पूजन करते हैं।
उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की सनातन विरोधी मानसिकता इससे भी साबित होती है कि उनके सांसद रामजी लाल सुमन महान योद्धा राणा सांगा को संसद में गद्दार कहा और अखिलेश यादव ने उनके बयान का समर्थन किया। सच्चाई यह है कि अपनी महान विरासत पर गर्व न करने वाले अखिलेश मुगलों के हमसफर बने हुए हैं। यह हिंदू समाज के लिए असहनीय है।
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