Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा। अक्षय पात्र फाउण्डेशन, वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मथुरा के संयुक्त प्रयास से ब्रज में रोपित कियें जाएंगे 11000 पौधे, स्वामी भक्ति वेदांत मार्ग स्थित अक्षय पात्र फाउण्डेशन एवं वृन्दावन चंद्रोदय मंदिर के प्रांगण में आज दिनांक 5 जुलाई 2020 दिन रविवार, गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व पर वन महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रभागीय निदेशक, वन विभाग मथुरा श्री रघुनाथ मिश्रा ने कहा कि “भगवान श्रीकृष्ण ने भगवत गीता के 10वें अध्याय में कहा है कि वृक्षों में मैं पीपल हूँ अतः मेरा विश्वास है कि अन्य वृक्षों में भी अन्य देवी देवताओं का वास होता है। इसलिए जहाँ हरियाली होगी, वहीं खुशहाली होगी।“
ब्रज भूमि में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय पौधों का रोपड़ कर इसे वैसा ही स्वरूप प्रदान किया जाए
कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए अक्षय पात्र फाउडेशन उ0प्र0 के अध्यक्ष श्री भरतर्षभा दास ने कहा कि “अक्षयपात्र फाउण्डेशन एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में हम ब्रज क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर 11 हजार पौधों का रोपण कर उनका संरक्षण व संवर्धन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इस्कॉन सोसायटी के संस्थापक श्रील प्रभुपाद जी सपना था कि ब्रज भूमि में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय पौधों (कदम्ब, तमाल आदि) का रोपड़ कर इसे वैसा ही स्वरूप प्रदान किया जाए जैसा कि भगवान श्री कृष्ण के समय था। उन्होंने बताया कि हमारे आगामी प्रकल्प चंद्रोदय मंदिर के आस-पास हम भगवान कृष्ण के समय के द्वादश कानन वन के प्रतिरूप को स्थापित करेंगे। जिसमें वट वृक्षों से घिरा भांडीर वन, ताड़ के वृक्षों से घिरा ताल वन और कमल पुष्पों के जलाशयों से सजा कुमुदवन आदि शामिल होगा।“
कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्रीय प्रबंधक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मथुरा श्री अरविन्द शर्मा, अक्षय पात्र फाउण्डेशन उ0प्र0 के अध्यक्ष श्री भरतर्षभा दास, अक्षय पात्र फाउण्डेशन वृन्दावन के उप उपाध्यक्ष श्री सुरेश्वर दास, श्री अनंतवीर्य दास, लोई बाजार वृन्दावन के पार्षद श्री वैभव अग्रवाल जी, के द्वारा द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
वृक्ष हमारे उत्पन्न प्रदूषण रूपी विष को ग्रहण करते हैं और हमें जीविन हेतु प्राण वायु रूपी अमृत प्रदान करते हैं
वहीं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मथुरा श्री अरविन्द शर्मा ने समुन्द्र मंथन का दृष्टांत देते हुए कहा कि “जब समुन्द्र मंथन हुआ तो उससे उत्पन्न विष को ग्रहण कर भगवान शिव नीलकंठ कहलाये, उसके अतिरिक्त अन्य रत्न एवं वस्तुऐं उत्पन्न हई जिन्हें अलग-अलग देवों ने ग्रहण किया। उसी प्रकार से वृक्ष हमारे समाज द्वारा उत्पन्न प्रदूषण रूपी विष को ग्रहण करते हैं और हमें जीवित रहने हेतु प्राण वायु रूपी अमृत प्रदान करते हैं।“ वहीं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मथुरा श्री अरविन्द शर्मा ने समुन्द्र मंथन का दृष्टांत देते हुए कहा कि “जब समुन्द्र मंथन हुआ तो उससे उत्पन्न विष को ग्रहण कर भगवान शिव नीलकंठ कहलाये, उसके अतिरिक्त अन्य रत्न एवं वस्तुऐं उत्पन्न हई जिन्हें अलग-अलग देवों ने ग्रहण किया। उसी प्रकार से वृक्ष हमारे समाज द्वारा उत्पन्न प्रदूषण रूपी विष को ग्रहण करते हैं और हमें जीवित रहने हेतु प्राण वायु रूपी अमृत प्रदान करते हैं।“
- किताबों के नाम पर ‘कमीशन का खेल’ — अभिभावकों का फूटा गुस्सा, पापा संस्था का बड़ा धमाका - March 22, 2026
- Mashhur qimorbozlarning sirli dunyosi Pin up casino bilan kashf eting - March 21, 2026
- Sort of Insurance policies - March 17, 2026