हिंसा नहीं ‘शास्त्र और संवाद’ है अस्त्र: अविमुक्तेश्वरानंद बोले— “संवैधानिक जिम्मेदारी याद दिलाने निकले हैं हम”

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रायबरेली/काशी। गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने और उत्तर प्रदेश से बीफ निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का बिगुल फूंक दिया है। शनिवार को काशी के शंकराचार्य घाट से शुरू हुई यह यात्रा जौनपुर, सुल्तानपुर और अमेठी होते हुए देर रात रायबरेली पहुँची, जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और जयकारों के साथ उनका स्वागत किया।

काशी में पूजन के बाद ‘रणभेरी’

यात्रा की शुरुआत से पहले शंकराचार्य ने काशी में गौमाता का पूजन किया। इसके बाद वे पालकी में सवार होकर चिंतामणि गणेश मंदिर और संकटमोचन हनुमान मंदिर पहुँचे, जहाँ हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ कर विजय का संकल्प लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह अहिंसक और वैचारिक होगा, जिसमें ‘शास्त्र और संवाद’ को ही मुख्य अस्त्र बनाया गया है।

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी चेतावनी

​शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें ‘असली या नकली हिंदू’ के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए 40 दिनों का समय दिया गया था, जिसमें से 36 दिन बीत चुके हैं। उन्होंने कहा, “गौमाता को राज्यमाता घोषित करने और बीफ एक्सपोर्ट पर रोक लगाने जैसी मुख्य मांगों पर सरकार की चुप्पी उनकी गो-भक्त विरोधी मानसिकता को दर्शाती है। अब सारी अपेक्षाएं शेष 3 दिनों पर टिकी हैं।”

​11 मार्च को लखनऊ में महाजुटान

शंकराचार्य ने बताया कि 11 मार्च को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ के तहत एक विशाल सभा आयोजित की जाएगी। इस सभा में देशभर के प्रमुख साधु-संत शामिल होंगे और यहीं से गौमाता की रक्षा के लिए भविष्य की रणनीति और बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी।

​जगह-जगह उमड़ा जनसैलाब

​शंकराचार्य का काफिला बाबतपुर, जमेठा, बदलापुर, ढकवा और लंभुआ होते हुए जब सुल्तानपुर और गौरीगंज पहुँचा, तो वहां उत्सव जैसा माहौल था।

अमेठी (गौरीगंज): यहाँ ‘गो-सांसद’ राकेश तिवारी के नेतृत्व में पादुका पूजन और धर्मसभा हुई। महिलाओं ने आरती उतारी और पुष्प वर्षा की।

​रायबरेली: झलकारी बाई चौराहे के पास यश पाण्डेय के निवास पर महाराज ने रात्रि विश्राम किया। हर पड़ाव पर शंकराचार्य ने भक्तों को संबोधित करते हुए 11 मार्च को भारी संख्या में लखनऊ पहुँचने का आह्वान किया।

Dr. Bhanu Pratap Singh