आगरा में गूंजा भक्ति का स्वर: श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी ने सुनाया ध्रुव-प्रह्लाद और नृसिंह अवतार का प्रसंग

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समय, संबंध और समझ जब प्रभु से जुड़ जाती है तो कल्याण हो जाता है : स्वामी श्री रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज

आगरा। पंचेश्वर महादेव मंदिर, कालिंदीपुरम कॉलोनी, मऊ रोड, खंदारी बायपास चौराहा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के तृतीय दिवस पर कथा व्यास अनंत श्री विभूषित स्वामी श्री रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज, श्रीधाम वृंदावन ने ध्रुव-प्रह्लाद चरित्र एवं श्रीनृसिंह अवतार का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में डूबकर भगवान के जयकारे लगाए।

कथा के दौरान स्वामी श्री रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कहा कि “समय, संबंध और समझ जब प्रभु से जुड़ जाती है तो कल्याण हो जाता है।” मनुष्य अपने जीवन का अधिकांश समय सांसारिक विषयों में व्यतीत कर देता है, जबकि वही समय यदि भगवान की भक्ति, सत्संग और सेवा में लगाया जाए तो जीवन धन्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि संबंधों की पवित्रता और सही समझ तभी सार्थक है जब उसका आधार ईश्वर और धर्म हों।

महाराजश्री ने कहा कि सनातन धर्म संपूर्ण धर्मों की जननी है। यह केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की श्रेष्ठ कला है। सनातन संस्कृति मानवता, करुणा, सेवा, सहिष्णुता और विश्व बंधुत्व का संदेश देती है। भारत की आध्यात्मिक परंपरा ने सदैव समस्त विश्व को सत्य और धर्म का मार्ग दिखाया है।

ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए महाराजश्री ने बताया कि बालक ध्रुव ने अपमान और उपेक्षा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसे भगवान की भक्ति का माध्यम बना लिया। कठोर तपस्या और अटूट विश्वास के बल पर उन्होंने भगवान विष्णु के दर्शन प्राप्त किए तथा ध्रुव पद को प्राप्त किया। यह प्रसंग सिखाता है कि दृढ़ संकल्प, श्रद्धा और भक्ति से असंभव लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रह्लाद ने विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान नारायण का स्मरण नहीं छोड़ा। उनके पिता हिरण्यकशिपु ने अनेक यातनाएं दीं, किंतु उनकी भक्ति अडिग रही। सच्चा भक्त वही है जो हर परिस्थिति में प्रभु पर विश्वास बनाए रखे।

श्रीनृसिंह अवतार प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि जब-जब धर्म पर संकट आता है और भक्तों पर अत्याचार बढ़ता है, तब भगवान स्वयं अवतार लेकर अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। भगवान नृसिंह ने खंभे से प्रकट होकर हिरण्यकशिपु का वध किया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। यह प्रसंग धर्म की विजय और अधर्म के विनाश का शाश्वत संदेश देता है।

मुख्य यजमान मनीष अग्रवाल एवं शिवानी अग्रवाल ने व्यास पूजन किया किया। इस अवसर पर जगदीश प्रसाद लवानिया, आशीष गौतम, जगमोहन गौतम, नानक चंद मिश्रा, कैलाश गौतम, जेपी शर्मा, शैलेंद्र सिंह दरोगा जी, धर्मेंद्र प्रताप सिंह, संजीव सिंह, निशांत सिंह कन्नू पार्षद, क्षेत्रपाल सिंह, यश कुमार दुबे, प्रीति मिश्रा, भू देवी राजपूत, कृष्ण सिंह, सारिका सिंह, इशिता सिंह, शानवी सिंह आदि उपस्थित रहे।

श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में सराबोर होकर भगवान के जयकारे लगाए और कथा के अंतिम चरण में प्रसाद ग्रहण किया।

Dr. Bhanu Pratap Singh