एक जटिल सर्जरी से सर्जन की आयु 5 दिन कम हो जाती है, स्ट्रेस दूर करने के लिए खेलेंगे, कूदेंगे, नाचेंगे गाएंगे…
एसोसिएशन आफ सर्जन्स आफ इंडिया के बैनर तले एसोसिएशन आफ सर्जन्स आगरा द्वारा राष्ट्रीय सर्जन्स वीक में कार्यक्रम शुरू
सर्जनों के तनाव और समर्पण की अनकही कहानी
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आगरा। क्या आप जानते हैं कि एक सिगरेट व्यक्ति के जीवन के लगभग 5 मिनट कम कर देती है और एक सर्जन जब जटिल सर्जरी करता है तो उसकी आयु 5 दिन कम हो जाती है। यह ऐसा मानसिक दबाव और तनाव है जिसे अक्सर घर-परिवार से भी साझा नहीं किया जा सकता। इसी तनाव को कम करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने के लिए देशभर के सर्जन खेलेंगे, दौड़ेंगे, नाचेंगे, गाएंगे, पौधारोपण करेंगे और समाजसेवा के विभिन्न कार्यों में भाग लेंगे। लगातार सात दिनों तक वे स्वयं के लिए भी समय निकालेंगे।
राष्ट्रीय सर्जन्स वीक का शुभारंभ
एसोसिएशन आफ सर्जन्स आफ इंडिया के बैनर तले एसोसिएशन आफ सर्जन्स आगरा द्वारा मंगलवार को होटल फेयरफील्ड बाई मेरिएट में राष्ट्रीय सर्जन्स वीक का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर पोस्टर विमोचन भी किया गया। 15 जून तक देशभर में आयोजित होने वाले सर्जन्स वीक के अंतर्गत सर्जन विभिन्न सामाजिक, स्वास्थ्य एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेंगे।

पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश
आगरा सर्जन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि देशभर में सर्जन्स वीक का आयोजन किया जा रहा है। 15 जून तक चलने वाले इस विशेष सप्ताह के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए पौधारोपण कार्यक्रम भी रखा गया है।
सर्जन निभाते हैं दोहरी जिम्मेदारी
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि व्यस्त दिनचर्या के बीच सर्जन स्वयं के लिए समय निकाल पाएंगे और एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकेंगे। उन्होंने कहा कि सर्जन पर सर्वाधिक जिम्मेदारी होती है क्योंकि वह फिजिशियन और सर्जन दोनों की भूमिका निभाता है।

मनोरंजन भी है आवश्यक
पूर्व अध्यक्ष, सोशल सर्विस निदेशक एवं वरिष्ठ सर्जन डॉ. सुनील शर्मा ने बताया कि यदि जीवन में मनोरंजन नहीं हो तो कार्यक्षमता लगभग 60 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकती है। इसी कारण सर्जनों के लिए मनोरंजन एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे गए हैं। 10 जून को रामलाल वृद्धाश्रम में चिकित्सा शिविर तथा 11 जून को रक्तदान शिविर आयोजित किया जाएगा।
तनाव मुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
डॉ. आर.एम. पचौरी ने कहा कि सर्जनों के पास तनाव दूर करने के बहुत सीमित साधन होते हैं, लेकिन राष्ट्रीय सर्जन्स वीक इस दिशा में सराहनीय प्रयास है। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा और कुशलता के कारण सर्जरी के परिणाम अत्यंत सफल और उत्साहजनक हो रहे हैं।
अत्याधुनिक तकनीकों पर होगी चर्चा
डॉ. समीर कुमार, ईसी सदस्य, एसोसिएशन आफ सर्जन्स आफ इंडिया ने बताया कि 13 जून को लाइव ऑपरेटिव वर्कशॉप आयोजित की जाएगी, जिसमें अत्याधुनिक तकनीकों एवं नवीनतम सर्जिकल प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।

खेल, संस्कृति और स्वास्थ्य का संगम
सचिव डॉ. जगत पाल सिंह ने बताया कि खेलकूद प्रतियोगिताओं के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। वाकथान और ईवीथान जैसी गतिविधियां भी इस सप्ताह का विशेष आकर्षण रहेंगी।
उपस्थित रहे ये प्रमुख चिकित्सक
कार्यक्रम में डॉ. राजेश गुप्ता, डॉ. शरद गुप्ता, डॉ. रविंद्र मोहन पचौरी, डॉ. मयंक जैन, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. उत्कर्ष, डॉ. करन रावत, डॉ. एच.एल. राजपूत तथा डॉ. ए.के. गुप्ता (इटावा) सहित अनेक चिकित्सकों की उपस्थिति रही।
सर्जन्स वीक के प्रमुख कार्यक्रम
10 जून: रामलाल वृद्धाश्रम, सिकंदरा में चिकित्सा शिविर (प्रातः 6 बजे से)
11 जून: स्विमिंग, चेस, कैरम, टेबल टेनिस एवं बैडमिंटन प्रतियोगिताएं, खेल गांव दयालबाग (प्रातः 6 बजे से 10 बजे तक) तथा रक्तदान शिविर, एसएन मेडिकल कॉलेज (अपराह्न 3 बजे से 4 बजे तक)
12 जून: पौधारोपण कार्यक्रम, सभी सर्जन अपने-अपने निवास स्थान पर पौधे लगाएंगे।
13 जून: लाइव ऑपरेटिव वर्कशॉप, सिनर्जी हॉस्पिटल, आगरा (अपराह्न 1 बजे से)
14 जून: योगा एवं ईवीथान, कृष्णा इंद्रप्रस्थ, शास्त्रीपुरम (प्रातः 6 बजे से)
15 जून: वाकथान, पालीवाल पार्क, आगरा (प्रातः 6 बजे से) तथा कल्चर नाइट, जिसका स्थान एवं समय शीघ्र घोषित किया जाएगा।
संपादकीय
सर्जन: जीवनदाता, जिनके त्याग को समझना होगा
जब कोई व्यक्ति ऑपरेशन थिएटर के बाहर अपने प्रियजन के लिए प्रार्थना कर रहा होता है, तब अंदर एक सर्जन अपनी वर्षों की साधना, अनुभव और कौशल को दांव पर लगाकर जीवन बचाने की लड़ाई लड़ रहा होता है। मरीज और उसके परिवार के लिए वह सर्जरी कुछ घंटे की घटना हो सकती है, लेकिन सर्जन के लिए वह अनेक वर्षों के अध्ययन, अभ्यास, मानसिक अनुशासन और अथक परिश्रम का परिणाम होती है।
एक जटिल सर्जरी केवल शरीर का ऑपरेशन नहीं होती, वह सर्जन के मन, मस्तिष्क और भावनाओं की भी परीक्षा होती है। हर निर्णय, हर चीरा और हर टांका जिम्मेदारी से भरा होता है। यही कारण है कि चिकित्सा जगत में सर्जनों का कार्य सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण और तनावपूर्ण माना जाता है।
समाज अक्सर मरीज के स्वस्थ होने की खुशी देखता है, लेकिन उस सफलता के पीछे छिपी सर्जन की चिंता, जागी हुई रातें, मानसिक दबाव और निरंतर अध्ययन को बहुत कम लोग समझ पाते हैं। एक छोटी सी त्रुटि की संभावना भी उन्हें भीतर तक बेचैन कर देती है। यही समर्पण उन्हें असाधारण बनाता है।
राष्ट्रीय सर्जन्स वीक केवल उत्सव नहीं है, बल्कि यह सर्जनों के मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सहभागिता और व्यक्तिगत संतुलन की आवश्यकता को स्वीकार करने का अवसर है। खेल, योग, संगीत, पौधारोपण और समाजसेवा जैसी गतिविधियां यह संदेश देती हैं कि दूसरों को जीवन देने वाले लोगों को भी अपने जीवन की गुणवत्ता बनाए रखने का अधिकार है।
सर्जन केवल डॉक्टर नहीं, बल्कि जीवनदाता, आशा के प्रहरी और मानवता के सच्चे सेवक हैं। समाज को उनके योगदान, त्याग और सेवा भावना का सम्मान करना चाहिए। जब कोई सर्जन ऑपरेशन थिएटर में प्रवेश करता है, तब वह केवल अपना कर्तव्य नहीं निभा रहा होता, बल्कि किसी परिवार की उम्मीदों को बचाने का प्रयास कर रहा होता है।
ऐसे सभी सर्जनों को नमन, जो अपने व्यक्तिगत सुख-दुख से ऊपर उठकर मानव जीवन की रक्षा के लिए निरंतर समर्पित हैं।
डॉ भानु प्रताप सिंह, संपादक
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