आगरा। ताजनगरी के मलपुरा क्षेत्र में एक सराफा व्यापारी से ढाई करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने एक ऐसे शातिर गैंग का भंडाफोड़ किया है जो पुलिस को चकमा देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर तकनीक का सहारा ले रहा था। पुलिस ने इस मामले में गौरव शर्मा, हृदेश, धीरज सिंह और लतीफ को गिरफ्तार किया है।
चैटजीपीटी (ChatGPT) का खतरनाक इस्तेमाल
पुलिस जांच में आरोपियों के काम करने के तरीके (Modus Operandi) ने सबको चौंका दिया। आरोपी मूल रूप से हिंदी भाषी थे, लेकिन पुलिस की जांच की दिशा भटकाने के लिए वे व्यापारी को भोजपुरी में धमकी देते थे। इसके लिए वे पहले हिंदी में धमकी भरा मैसेज लिखते थे और फिर चैटजीपीटी (ChatGPT) जैसे एआई टूल की मदद से उसे शुद्ध भोजपुरी में अनुवाद कर लेते थे। फोन कॉल के दौरान वे उसी अनुवादित मैसेज को पढ़ते थे ताकि पुलिस को लगे कि गिरोह बिहार या पूर्वांचल का है।
मुंबई की लोकेशन और वर्चुअल नंबर का जाल
व्यापारी को डराने के लिए आरोपी वर्चुअल नंबर्स और इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल करते थे। जब पुलिस ने कॉल को ट्रेस करना शुरू किया, तो शुरुआती लोकेशन मुंबई दिखाई दी, जिससे लगा कि अंडरवर्ल्ड या किसी बड़े बाहरी गैंग का हाथ है। लेकिन साइबर सेल की तकनीकी जांच और डिजिटल फुटप्रिंट्स के जरिए पुलिस अंततः इन स्थानीय आरोपियों तक पहुँच गई।
चोरी के बाद बनाई रंगदारी की योजना
पूछताछ में पता चला कि सराफा व्यापारी के यहाँ हाल ही में हुई एक चोरी की घटना के बाद इन आरोपियों ने उसे और अधिक मानसिक दबाव में लेने की योजना बनाई। आरोपियों ने सोचा कि डरा-धमका कर व्यापारी से मोटी रकम वसूली जा सकती है। उन्होंने व्यापारी से ढाई करोड़ रुपये की मांग की और पैसे न देने पर परिवार सहित जान से मारने की धमकी दी।
साइबर सेल और मलपुरा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
व्यापारी की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आगरा पुलिस की साइबर सेल और मलपुरा पुलिस ने जाल बिछाया। तकनीकी सर्विलांस और सर्विलांस डेटा के गहन विश्लेषण के बाद चारों आरोपियों को घेराबंदी कर दबोच लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गिरोह ने तकनीक का सहारा लेकर अन्य व्यापारियों को भी अपना शिकार बनाया है।
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