अयोध्या में मीडिया कवरेज पर सख्त पाबंदियाँ: राम मंदिर परिसर के बाहर रिपोर्टिंग के लिए अब एसपी सुरक्षा की अनुमति अनिवार्य

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अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और अनियमितताओं के मामले के बीच अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि परिसर के बाहर मीडिया की पहुंच पर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। अब मंदिर के सामने किसी भी प्रकार की मीडिया कवरेज के लिए पुलिस अधीक्षक (एसपी सुरक्षा) की पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। इस निर्णय के बाद बिना अनुमति के रिपोर्टिंग करने वाले मीडिया कर्मियों को सुरक्षा बल परिसर के पास से हटा रहे हैं।

कांग्रेस का तीखा प्रहार

मीडिया कवरेज पर लगी इस रोक के बाद उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर वीडियो साझा करते हुए सवाल किया कि यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो स्वतंत्र मीडिया को रिपोर्टिंग से क्यों रोका जा रहा है?

कांग्रेस ने लिखा, “लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका सत्ता से सवाल पूछने की होती है, न कि केवल सरकारी प्रचार दिखाने की।”

​कांग्रेस ने आगे कहा कि यदि कुछ चुनिंदा कैमरों को ही कवरेज की अनुमति दी जा रही है और बाकी पत्रकारों पर पाबंदी लगाई जा रही है, तो यह पारदर्शिता नहीं, बल्कि सूचना पर नियंत्रण की कोशिश है। पार्टी ने यह भी जोड़ा कि सवाल पूछने वाले पत्रकार लोकतंत्र के दुश्मन नहीं, बल्कि उसकी नींव हैं।

बढ़ता संदेह और राजनीतिक दबाव

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण के बाद से ही मंदिर प्रबंधन और सरकारी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। ऐसे में मीडिया पर प्रतिबंध लगने से राजनीतिक गलियारों में संदेह और गहरा गया है। विपक्ष का तर्क है कि मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए वहाँ होने वाली हर गतिविधि जनता के प्रति जवाबदेह होनी चाहिए।

प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दिया जा रहा है, ताकि परिसर में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। हालांकि, विपक्ष इसे मामले को दबाने और सच्चाई को सार्वजनिक होने से रोकने का प्रयास बता रहा है। यह घटनाक्रम अब राज्य की राजनीति में नया मोड़ ले चुका है, जहाँ ‘पारदर्शिता बनाम सुरक्षा’ के बीच बहस छिड़ गई है।

Dr. Bhanu Pratap Singh