होली रंगों का त्योहार होने के साथ ही साथ असमानता को दूर करने का भी त्योहार है। यह तो हार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। बसंत ऋतु में होली का त्योहार आता है। फागुन मास की पूर्णिमा के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत पर होलिका दहन किया जाता है। चैत्र मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को होली मनाया जाता है । होलाष्टक होली के 8 दिन पहले से माना जाता है। 2021 में होलाष्टक 22 मार्च से 28 मार्च तक है। इस अंतराल कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। होलाष्टक में यथासंभव दान करना श्रेयस्कर माना गया है। 2021 में होलिका दहन 28 मार्च एवं रंगो की होली 29 मार्च को खेली जाएगी। होलिका दहन का समय सायं 6:30 से 8:55 तक होगा।
होली का त्योहार ठंड और गर्मी के बीच में आने वाला त्योहार है। इस वक्त मौसम में बदलाव आने के कारण शरीर और वातावरण में बैक्टीरिया उत्पन्न होता है जिसकी वजह से इस मौसम में चेचक, खसरा, मलेरिया जैसी बीमारी का खौफ बना रहता है। अगर हम साइंटिफिक कारण की तरफ जाएं तो होलिका दहन का बहुत महत्व है क्योंकि वातावरण में बदलाव के कारण उत्पन्न होने वाले बैक्टीरिया होलिका दहन के वक्त समाप्त हो जाते हैं क्योंकि उस वक्त तापमान बहुत उच्चतम रहता है। जब हम सब अग्नि के सामने परिक्रमा लगा रहे होते हैं तो हम सब बैक्टीरिया मुक्त हो जाते हैं। जैसा कि हम सब जानते हैं कि अभी पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है तो होलिका दहन वाले दिन परिक्रमा जरूर लगाएं एवं उसकी तापमान के समक्ष कुछ देर जरूर बैठे। कृपया करके सभी से विनती है कि होली दहन के लिए हरा-भरा वृक्ष ना काटें। होली के दिन सूर्यास्त के समय ना सोएं और ना ही कोई विवाद करें। इस दिन मदिरा का सेवन ना करें एवं सात्विक भोजन खाएं।
पिछले वर्ष और इस वर्ष कोविड-19 कुछ सावधानी जरूर रखनी है। सर्वप्रथम जिनको भी थोड़ा भी सर्दी है और इम्यूनिटी कमजोर है, वह इस साल होली ना खेलें। अपने परिवार के सदस्य एवं दोस्तों के साथ ही होली खेलें। सामाजिक तौर पर होली ना खेले। आंख और नाक के आसपास रंग ना लगाएं। होली खेलते वक्त मास्क का प्रयोग जरूर करें। गुलाल या सूखे रंग से ही होली खेलें। रंग से होली खेलने से खतरा और बढ़ सकता है। होली खेलने के लिए खुली जगह का चयन करें। भीड़ भाड़ की जगह से बचें। होली खेलने के पश्चात अच्छे से किसी भी एंटीसेप्टिक साबुन से हाथ पैर को धोएं और उसके पश्चात भाप अवश्य लें।
हमारे जीवन में रंग का विशेष महत्व है। प्रत्येक रंग में कुछ ना कुछ विशेषताएं हैं। प्रत्येक रंग हमारे मस्तिष्क में कुछ न्यूरो पैटर्न रिलीज करता है। जिसको धन की कमी है और जो अपना काम को बढ़ाना चाहते हैं वह नीले रंग का उपयोग करें। पीला रंग मां सरस्वती और विष्णु जी का रंग माना गया है। यह रंग खुशी लेकर आता है। धरती में जब अंकुर उठता है तो भी वह पीले रंग का ही फूटता है। अतः अपने जीवन में खुशी लाने के लिए पीले रंग का उपयोग करें। लाल रंग पावर को दर्शाता है। गुणात्मक रंग है यह। जो भी व्यक्ति सत्ता में है और सत्ता में अपना नाम रोशन करना चाहते हैं वह लाल रंग का उपयोग करें। यह रंग मां लक्ष्मी का भी प्रिय रंग है। अतः धन को आकर्षित करने के लिए इस रंग का उपयोग करें। हरा रंग प्रकृति को दर्शाता है। कुदरत के साथ ही हमारे जीवन में भी उन्नति होती है। हरा रंग बहुत सुकून देने वाला होता है। अतः जिन्हें अपने जीवन में शांति एवं सुकून चाहिए वह हरा रंग का उपयोग करें।
होली खेलने के वैज्ञानिक कारण की तरफ अगर हम दृष्टि डालें तो बहुत सारे वैज्ञानिक कारण हैं। सर्वप्रथम यह समय बैक्टीरिया के उत्पन्न होने के कारण होलिका दहन के वक्त इससे हमें निजात दिलाता है। होलिका दहन की राख हो अगर हम अपने मस्तक पर लगाते हैं तो हमें स्वास्थ्य लाभ होता है। होली में हम मस्ती के माहौल में रहते हैं तो हमारे शरीर से आलस्य का त्याग होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। होली खेलते वक्त हमारा एक प्रकार का व्यायाम भी हो जाता है क्योंकि इस वक्त शारीरिक भागदौड़ बहुत होती है जिससे हमारी इम्युनिटी स्ट्रांग होती है।
होलिका दहन में किए जाने वाले कुछ कार्य जो कि हमारे जीवन में सफलता देंगे-सर्वप्रथम अगर हमें व्यापार में लगातार घाटा हो रहा है तो व्यापार में तरक्की के लिए होलिका दहन वाले दिन पीला कपड़ा में काली हल्दी गोमती चक्र, 1रुपये का सिक्का रखकर अग्नि की 11 बार परिक्रमा करें। 1 साल के लिए अपने पास सुरक्षित जगह के रख दें और अगले साल जमीन में गाड़ दें। होलिका दहन के समय पीपल के पेड़ के पास दीपक अवश्य जलाएं। ऐसा करने से स्वास्थ्य लाभ होता है। होलिका दहन की राख को घर लाकर उसमें पीली सरसों मिलाकर घर के बाहर रोज छिड़क दें इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। होलिका दहन की अग्नि में जौ और आटा अर्पित करें इससे घर में शांति बनी रहती है। होलिका दहन की राख का रोज तिलक लगाएं इससे आपके निर्णय लेने की शक्ति मजबूत होगी।
अंक ज्योतिष के अनुसार किस रंग का प्रयोग किया जाना चाहिए यह भी बहुत महत्वपूर्ण है।
1, 10, 19 ,28 तारीख में जन्म लिए व्यक्ति को गेंदे के फूल का पेस्ट बनाकर रंग में मिलाकर होली खेलनी चाहिए।
2,11, 20,29 तारीख में जन्म लिए व्यक्ति को सफेद रंग एवं सफेद फूल से होली खेलनी चाहिए।
3 ,12, 21, 30 तारीख में जन्म लिए व्यक्ति को केसरिया पीले फूल हरा रंग का उपयोग करना चाहिए।
4 ,13 ,22,31 मे जन्म लिए व्यक्ति को सफेद रंग या सिल्वर रंग से होली खेलनी चाहिए।
5 ,14, 23 तारीख में जन्म लिए व्यक्ति को लाल रंग एवं लाल फूल से यह त्यौहार मनाना चाहिए।
6 ,15 ,24 में जन्म लिए व्यक्ति को चमकीले रंग एवं गुलाबी रंग का प्रयोग करना चाहिए।
7,16, 25 तारीख में जन्म लिए व्यक्ति को काला रंग एवं उसमें काला तिल मिलाकर होली खेलनी चाहिए।
8, 17 ,26 तारीख में जन्मे व्यक्ति को नीले फूल एवं नीले रंग का उपयोग करना चाहिए।
9 ,18 ,27 तारीख में जन्म लिए व्यक्ति को गुलाबी रंग और गुलाल से होली खेलनी चाहिए।
जो व्यक्ति हमेशा किसी ना किसी प्रकार के भय से घिरा रहता है, वह लाल रंग का उपयोग अवश्य करें। जिनका कैरियर रचनात्मक है या जिसको अपनी रचनात्मकता बढ़ानी है, वह नारंगी रंग का उपयोग करें। जो व्यक्ति अपने कार्य क्षेत्र में तरक्की चाहता है या जिसे अपने करियर का चयन करने में कठिनाई हो रही है वह पीले रंग से होली खेले। जिस व्यक्ति के अंदर भावनाओं की कमी है या आपसी परिवार में प्रेम की कमी है वह गुलाबी एवं हरा रंग का प्रयोग करें। अपने अंदर नेतृत्व की क्षमता को बढ़ाने के लिए नीले रंग का प्रयोग करना श्रेष्ठ होता है।
शिल्पा जैन, ज्योतिषवेत्ता
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