Mathura (Uttar Pradesh, India)। मथुरा। विवेचना में लापरवाही बरतने और विवेचना को लंबित रखने के आरोप में एक दरोगा को लाइन हाजिर किया है। थाना सुरीर पर तैनात उपनिरीक्षक सुरेन्द्र सिंह भाटी धारा 307 से संबंधित विवेचना में लापरवाही बरतने और विवेचना को अनावश्यकरूप से लंबित रखने के मामले में थाना सुरीर से पुलिस लाइन स्थानांतरित किया गया है तथा विभागीय जांच के आदेश दिये गये हैं। मथुरा में आईपीसी की धारा 307 में लोगों को फर्जी तरीके से फंसाया जा रहा है। यह पूरा खेल कर तो पुलिस रही है लेकिन असली खिलाडी जिला चिकित्सालय के वह कर्मचारी हैं जो पुलिस को यह सब करने का रास्ता देते हैं। अभी तक जांच में यह तथ्य साबित हुआ है कि मामलू झगडों में भी प्रभावशाली लोग मिली भगत से धारा 307 बनवा देते हैं।
चार्जशीट लगाने में पुलिस जल्दबाजी करती है, मामलों में जरूरत से ज्यादा धीमी जांच चलती है
वरिष्ठ अधिवक्ता एलके गौतम का कहना है कि कई मामलों में यह देखा जाता है कि चार्जशीट लगाने में पुलिस जल्दबाजी करती है, वहीं कुछ मामलों में जरूरत से ज्यादा धीमी जांच चलती है। यह सब किसी एक पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए किया जाता है। धारा 307 गंभीर धाराओं में शामिल है, 307 लगाने के लिए पहले पर्याप्त सबूत जरूरी होते हैं। इसके लिए स्वास्थ्य परीक्षण रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण रहती है।
एनसीआर की जानकारी आरोपी को नहीं दी जाती है, जिला चिकित्सालय के कर्मचारियों का खेल शुरू होता है
जुलाई में एसएसपी डा.गौरव ग्रोवर द्वारा पूरे झमेले को समझने के लिए इस तरह के दो मामालों की स्टडी केस के तौर पर जांच कराई थी। जांच में सामने आया था कि फर्जी मुकदमे में फंसाने के लिए पुलिस मिलीभगत कर गुपचुप तरीके से एनसीआर दर्ज करती है। यह सब इतना गोपनीय होता है कि एनसीआर की जानकारी तक आरोपी को नहीं दी जाती है। इसके बाद जिला चिकित्सालय के कर्मचारियों का खेल शुरू होता है फर्जी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कराई जाती है। इसके अधार पर धारा 307 बढा कर में एनसीआर को मुकदमे में तरमीम कर लिया जाता है। इतना सब कुछ हो जाने तक आरोपी मामले से पूरी तरी अनभिज्ञ रहता है। कागजी खानापूर्ति के बाद पुलिस अचानक किसी दिन आरोपी को गिरफ्तार करने पहुंच जाती है। जबकि आरोपी को कुछ पता नहीं होता कि पुलिस उसके साथ कर क्या रही है? इस तरह के दो दर्जन से अधिक मामले अब जांच के दायरे में हैं।
थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर कर दिया था। इन थाना प्रभारियों की कार्यशैली से एसएसपी नाराज चल रहे थे
28 जून को जिले को भी एसएसपी ने सुरीर, रिफाइनरी, हाईवे और शेरगढ़ थाना प्रभारियों को लाइन हाजिर कर दिया था। इन थाना प्रभारियों की कार्यशैली से एसएसपी नाराज चल रहे थे। इनके अलावा कई थाना प्रभारियों को बदला है। शहर कोतवाली की जिम्मेदारी संजीव कुमार को सौंपी है।
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