काशी से लखनऊ तक ‘गौ-क्रांति’ का शंखनाद: पालकी पर सवार होकर ‘धर्म युद्ध’ पर निकले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद

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वाराणसी। धर्म नगरी काशी से शनिवार की सुबह एक ऐतिहासिक ‘धर्म युद्ध’ का शंखनाद हुआ। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौमाता को ‘राज्य माता’ का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर अपनी ‘गो-प्रतिष्ठार्थ धर्म युद्ध’ यात्रा शुरू कर दी है। पालकी पर सवार होकर निकले शंकराचार्य के साथ संतों और भक्तों का भारी हुजूम ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के साथ लखनऊ की ओर बढ़ चला है।

मठ से मंदिर तक पूजन और प्रस्थान

शंकराचार्य शनिवार सुबह वाराणसी स्थित श्री विद्या मठ से रवाना हुए। सबसे पहले उन्होंने चिंतामणि गणेश मंदिर में दर्शन-पूजन कर यात्रा की निर्विघ्नता की कामना की। इसके बाद वह संकट मोचन मंदिर पहुँचे, जहाँ हनुमान चालीसा का पाठ कर उन्होंने अपनी यात्रा को गति दी। शंकराचार्य ने कहा, “हम गंगा के तट से गोमती के तट की ओर जा रहे हैं। यह यात्रा गौमाता के सम्मान की रक्षा के लिए है।”

​यात्रा का रूट और 11 मार्च की समय सीमा

यह पदयात्रा वाराणसी से जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली और उन्नाव होते हुए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहुँचेगी। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी को औपचारिक निमंत्रण नहीं भेजा है; जो भी गौमाता को अपनी माता मानता है, वह स्वयं इस धर्म युद्ध का हिस्सा बन रहा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि 11 मार्च को यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि कौन गौमाता के पक्ष में है और कौन विरोध में।

​सरकार से उम्मीद, पर झुकने को तैयार नहीं

अपनी मांगों पर बात करते हुए शंकराचार्य ने कहा, “हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या दल के खिलाफ नहीं है। यह सरकार हमारी अपनी है, जिसे हमने ही चुना है। ये वही लोग हैं जो गौ-रक्षा की शपथ लेकर सत्ता में आए हैं।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि उनकी शांतिपूर्ण मांग पर प्रहार किया गया, तो वे उसे झेलने और पलटवार करने की क्षमता भी रखते हैं।

अनुमति का पेंच और अटूट विश्वास

लखनऊ में प्रदर्शन की अनुमति अभी तक न मिलने के सवाल पर शंकराचार्य पूरी तरह आश्वस्त नजर आए। उन्होंने कहा, “हमें अनुमति जरूर मिलेगी। हम कोई अशांति फैलाने नहीं जा रहे हैं, बल्कि अपनी धार्मिक और संवैधानिक मांग रख रहे हैं। पुलिस और प्रशासन अपनी जांच कर रहे हैं, हमें उम्मीद है कि 11 मार्च तक स्थितियां स्पष्ट हो जाएंगी।”

धर्म और राजनीति के बीच गौमाता

​शंकराचार्य की इस यात्रा ने उत्तर प्रदेश की सियासत और धार्मिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। गौमाता को राज्य माता का दर्जा दिलाने की यह मांग अब एक जन-आंदोलन का रूप लेती दिख रही है। 11 मार्च को लखनऊ में होने वाला शंखनाद इस आंदोलन की अगली दिशा तय करेगा।

Dr. Bhanu Pratap Singh