रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां 22 वर्षीय बीए छात्र ने पढ़ाई-लिखाई छोड़कर संन्यास का रास्ता चुन लिया। युवक के इस फैसले से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। बताया जा रहा है कि 1 जनवरी को घर से निकला अमर कमल रस्तोगी जब वापस नहीं लौटा तो परिजन परेशान हो गए। शुरुआत में परिवार को लगा कि वह कॉलेज गया होगा, लेकिन बाद में सच्चाई सामने आने पर सभी के होश उड़ गए।
व्हाट्सएप स्टेटस से खुला राज
परिजनों के अनुसार, अमर कमल रस्तोगी ने प्रयागराज के संगम तट पर जाकर संन्यास की दीक्षा ले ली। जब उसने भगवा वस्त्रों में अपनी तस्वीर व्हाट्सएप स्टेटस पर लगाई, तभी परिवार को पता चला कि उनका बेटा अब गृहस्थ जीवन छोड़कर साधु-संतों की राह पर निकल चुका है।
पिता पहुंचे माघ मेले, भावुक दृश्य देख नम हुई आंखें
बेटे की जानकारी मिलते ही अमर के पिता बदहवास हालत में प्रयागराज माघ मेले में पहुंचे और बेटे के शिविर तक गए। वहां का दृश्य बेहद भावुक कर देने वाला था। पिता बेटे के सामने रो पड़े और उसके पैरों में गिरकर घर लौटने की विनती करने लगे। उन्होंने बेटे से कहा कि वह अभी पढ़ाई की उम्र में है और घर के लिए उसकी जरूरत है।
बेटे ने लौटने से किया इनकार
हालांकि, अमर कमल रस्तोगी ने पिता की भावनात्मक अपील के बावजूद घर लौटने से साफ इनकार कर दिया। उसने कहा कि अब उसका गृहस्थ जीवन से कोई संबंध नहीं है और वह संन्यास का मार्ग अपना चुका है।
‘प्रकट धाम’ में गुरु शरण में रहने की बात
परिजनों के मुताबिक अमर फिलहाल ‘प्रकट धाम’ में गुरु शरण में है। इधर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन अमर अपने निर्णय पर अडिग बना हुआ है।
समाज में चर्चा का विषय बना मामला
युवक के इस कदम के बाद इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। लोग इसे आस्था और वैराग्य से जोड़कर देख रहे हैं, तो कई लोग इसे भावनात्मक निर्णय मान रहे हैं।
अब सवाल यही है कि क्या पढ़ाई की उम्र में वैराग्य का रास्ता चुनना सही है, या यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया कदम है?
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