आगरा: जीवन केवल ‘सही’ या ‘गलत’ के बीच का चुनाव नहीं है, बल्कि यह उन गहरे सवालों की खोज है जो हमारी चेतना को जगाते हैं। इसी दार्शनिक विचार को अपनी तूलिका से जीवंत किया है शहर की उभरती अंतरराष्ट्रीय कलाकार रिया एम. गुप्ता ने। रविवार को विजय नगर स्थित विजय क्लब में रिया की 109 मौलिक कृतियों की प्रदर्शनी ‘सत्य की खोज’ का शुभारंभ हुआ।
कला नहीं, आत्मचिंतन की यात्रा
प्रदर्शनी का उद्घाटन लायंस क्लब के पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जितेन्द्र चौहान ने किया। उन्होंने रिया की कला की सराहना करते हुए कहा कि ये चित्र केवल दृश्य सौंदर्य नहीं हैं, बल्कि ये दर्शक को अपने भीतर झांकने और आध्यात्मिक गहराई को महसूस करने के लिए मजबूर करते हैं।
’क्यों’ से शुरू होती है चेतना
वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में मास्टर्स की पढ़ाई कर रहीं रिया ने बताया कि उनकी कला यात्रा 18 वर्ष की आयु से शुरू हुई। उन्होंने कहा “मेरी कला ‘ओके’ या ‘नॉट ओके’ तक सीमित नहीं है। मैं अपनी पेंटिंग्स के जरिए जीवन के ‘क्यों’ को तलाशती हूँ, क्योंकि सवाल पूछने से ही मनुष्य की चेतना जागृत होती है।”
माध्यमों का अनूठा प्रयोग
प्रदर्शनी में जलरंग, एक्रेलिक और ऑयल पेस्टल के साथ-साथ कई प्रयोगधर्मी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। रिया की कृतियाँ प्रेम, भ्रम, आनंद और आत्मबोध की मानवीय यात्रा को प्रतीकात्मक रूप में दर्शाती हैं।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
द्वितीय सत्र का शुभारंभ केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने किया। उन्होंने रिया की कला को समकालीन चेतना और संवेदनशीलता का बेजोड़ उदाहरण बताया। इस अवसर पर भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, अजय भार्गव, प्रमोद गुप्ता, रामनिवास गुप्ता सहित शहर के कई प्रबुद्ध कलाकार और कला प्रेमी मौजूद रहे। ऋषि गुप्ता और मधु गुप्ता की पुत्री रिया की इस सफलता में उनकी मार्गदर्शिका जानवी और शिक्षिका दीप्ति का विशेष योगदान रहा।
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