आगरा विकास मंच के वेबिनार में मैक्स हॉस्पिटल, साकेत, दिल्ली में कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. विवेका कुमार ने दी चेतावनी
यूपी के आगरा, वाराणसी, कानपुर में प्रदूषण के कारण हृदयरोगी अधिक, हृदयरोगियों को कोरोना काल में स्वस्थ रहने के टिप्स
Agra, Uttar Pradesh, India । कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच आगरा विकास मंच ने मैक्स हॉस्पिटल, साकेत, दिल्ली में कार्डियोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉक्टर विवेका कुमार का आम जनता के साथ सीधा संवाद कराया। वेबिनार के माध्यम से हुए कार्यक्रम में डॉ. विवेका कुमार ने जानलेवा बन गए कोरोना से बचाव के उपाय बताए। हृदय रोगियों को उपयोगी सलाह दी। साथ ही तमाम तरह की शंकाओं को दूर किया। उन्होंने कहा कि हकीकत ये है कि कोरोना अगले दो साल तक रहेगा। वैक्सीन आ गई तो राहत मिलेगी। मास्क पहनना, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथ धोना जारी रखना है। फिलहाल तो इसी से बचाव होना है।
आई ट्रैक के सीईओ आशीष जैन ने किया स्वागत
आई ट्रैक के सीईओ आशीष जैन ने स्वागत करते हुए आगरा विकास मंच के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा- आगरा विकास मंच की स्थापना अशोक जैन सीए ने की थी। तभी से डॉ. विवेका कुमार जुड़े हुए हैं। वे मंच के संरक्षक हैं। मंच ने 1500 से अधिक हार्ट सर्जरी कराई हैं। अनेक स्वास्थ्य शिविर, रक्तदान शिविर, नेत्रदान, विकलांगों के लिए उपकरण वितरण जैसे अनेकानेक कार्य किए हैं। कोरोना के खतरे से लोगों को बचाया। इस दौरान भोजन वितरण, विसंक्रमण, मास्क वितरण जैसे सराहनीय कार्य किए गए हैं। प्रख्यात फिजीशियन डॉ. बीके अग्रवाल ने बताया कि डॉ. विवेका कुमार चिकित्सा रत्न, विद्या रत्न, इंटरनेशनल अवॉर्ड एक्सीलेंसी ऑफ कॉर्डियोलोजी जैसे तमाम अवॉर्ड से सम्मानित है।
गैस का दर्द और हृदयाघात
डॉ. विवेका कुमार ने कहा – कोरोना हमें बहुत कुछ सिखा रहा है। कोरोना के कारण 400 युवा चिकित्सकों की मौत हो चुकी है। अब हमें क्या करना है, इस पर बात होनी चाहिए। हृदयरोगियों के लिए कोरोना प्राणघात है। चिन्ता की बात यह है कि 20 से 25 साल के युवा अधिक प्रभावित हैं और मौतें हो रही हैं। कोरोना संक्रमण के कारण रक्तवाहिकाएं ब्लॉक हो रही हैं। यह देखा गया है कि 65 फीसदी लोगों में हृदयरोग का कोई लक्षण नहीं होता है। अचानक हृदयाघात हो जाता है। हृदयाघात से मरने वाले 50 फीसदी लोगों में कोई प्रारंभिक लक्षण नहीं मिलते हैं। हमें ध्यान रखना है कि हृदय में दर्द हृदयाघात का लक्षण है, जिसे हम गैस का दर्द कहकर नकार देते हैं।

कुर्सी पर बैठे रहने से खतरा अधिक
उन्होंने कहा- जो चेयर पर बैठे रहकर काम करते हैं, उनमें खतरा अधिक है। जितना अधिक नुकसान धूम्रपान से होता है, उतना ही नुकसान बैठे रहकर कार्य करने से है। जहां प्रदूषण अधिक वहां हृदयरोग की बीमारी अधिक है। यूपी की बात करें तो आगरा, वाराणसी, कानपुर में प्रदूषण अधिक है इसलिए इन शहरों में हृदयरोगी अधिक हैं। हार्ट की बीमारी से मरने वालों की संख्या कैंसर से भी अधिक है। महिलाओं को पहले अटैक में ही लाइफ का खतरा अधिक रहता है। अगर हमने प्रारंभिक तौर पर हार्ट की बीमारी की पहचान कर ली तो 99 फीसदी लाइफ को बचाया जा सकता है। यह मिथक है कि महिलाओं को हृदय की बीमारी नहीं होती है।
ऐसे बचें हृदयरोगी बनने से
डॉ. विवेक कुमार ने बताया कि हृदयरोग हमारी दिनचर्या से प्रभावित होता है। अगर सामान्य से उपाय किए जाएं तो समस्या का हृदयाघात से बचा जा सकता है- हाई कैलोरी, मसालेदार व अधिक चिकनाई युक्त भोजन, मिठाई, तम्बाकू, जंक फूड और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। नमक कम से कम लें। नियमित व्यायाम करें। 4000 से 5000 स्टेप एक दिन में चलना जरूरी है। तनावरहित रहें। प्रदूषण से बचें। 6-8 घंटे नींद लें। आठ घंटे से अधिक सोने से हृदय रोग हो सकता है। शुगर और बीपी चेक कराते रहें। इकोकार्डियोग्राफी कराएं। सीटी एंजियोग्राफी ऐसा टेस्ट है जिससे पता चल जाता है कि आगामी 10 साल में हार्ट के साथ क्या होने वाला है। शुगर नियंत्रित रखें। कोलेस्ट्रोल का नियंत्रित करें। स्मोकिंग बंद करें। शराब से भी बीमारी होती है। यह सोचना गलत है कि थोड़ी शराब पीने से कुछ नहीं होगा। वजन न बढ़ने दें। पेट बाहर नहीं निकलना चाहिए। हेल्दी फूड हो। पश्चिमी देशों में हार्ट की बीमारी कम क्योंकि वहां लोग जंक फूड कम खाते हैं। तेल को बार-बार गर्म करने सैचुरेटेड फैट जमा होता है। रेड मीट कम खाएं। फाइबर और प्रोटीन की मात्रा भोजन में बढ़ाएं। मक्खन का प्रयोग न करें। सोया अधिक लें। खाने में ऊपर से नमक कतई न डालें। मधुमेह के साथ किडनी की बीमारी होने से हार्ट की बीमारी का खतरा अधिक बढ़ जाता है। हमें रिस्क फैक्टर का मैनेजमेंट बचपन से करना होगा। हार्ट की बीमारी का थोड़ा सा भी शक हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
इस समय कोरोना के कारण हृदयाघात
उन्होंने सवालों के जवाब में कहा- इम्युनिटी कम होने से बैक्टीरियल संक्रमण बढ़ जाते हैं। इस समय एक तिहाई हार्ट की बीमारी कोरोना के कारण है। कोरोना के साथ अगर हार्ट की बीमारी जुड़ गई तो मौत का खतरा बढ़ जाता है। कोरोना की दवा के साइड इफैक्ट के सवाल पर कहा कि इनका प्रभाव 48 घंटे में खत्म हो जाता है। कोरोना से हार्ट और लंग्स को नुकसान होता है, जो काफी समय तक बना रहता है। कोरोना ठीक होने के बाद भी समस्या बनी रहती है। हमें सततरूप से टेस्ट करवाना होगा। दवा बंद नहीं करनी है। चिकित्सकों को सलाह दी कि कोविड पेशेंट के लिए टेली कंसल्टेशन सुरक्षित है। ऑक्सीजन सैचुरेशन कम हो जाएगा तो हार्ट पर असर होता है। इसी कारण लंग्स की बीमारी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ानी होती है। सामान्य मास्क लगाकर व्यायाम करने से लोग बेहोश हो सकते हैं। व्यायाम के समय एयर स्पेश मास्क पहनें। 10-15 मिनट संपर्क में रहने से कोरोना होता है। अगर प्रदूषण नहीं है तो वर्कआउट बाहर करें । ग्रुप में व्यायाम नहीं करना है। हृदयरोगियों के लिए 35 मिनट एयरोबिक व्यायाम जरूरी है। घर में हैं तो ऐसी में कर सकते हैं व्यायाम। हृदयरोगियों के लिए वेट लिफ्टिंग को अच्छा व्यायाम नहीं माना जाता है। वजन शनै-शनै घटना चाहिए। जोगिंग के साथ डाइट कंट्रोल जरूरी है। मिठाई से दूर रहें। ठीक हो चुके कोरोना मरीजों में फिर से कोरोना के लक्षण द्वितीयक संक्रमण है। एंटीबॉडीज तीन माह से अधिक नहीं रह पा रही है। यह एक बड़ी समस्या है। स्टेरायड दिए जाते हैं ताकि मृत्यु दर कम हो। स्टेरायड छह माह तक दे सकते हैं। एंटी वायरल इंजेक्शन इसलिए देते हैं ताकि वायरल खतरनाक रूप धारण न कर ले।
इन्होंने पूछे सवाल
आगरा विकास मंच के अध्यक्ष राजकुमार जैन ने वेबिनार की अध्यक्षता की। मंच के मेडिकल प्रकोष्ठ के प्रमुख सर्जन डॉ. सुनील शर्मा ने आभार जताते हुए डॉ. विवेका कुमार को फरिश्ता की संज्ञा दी। जाने-माने फिजीशियन डॉ. बीके अग्रवाल ने संचालन लिया। डॉ. अरुण जैन, डॉ. रमेश धमीजा, डॉ. विजय कत्याल, मंच के संयोक सुनील कुमार जैन, प्रवक्ता संदेश जैन, महामंत्री सुशील जैन, ध्रुव जैन, प्रशांत मिश्रा, महेन्द्र जैन, प्रशांत मिश्र, डॉ. भानु प्रताप सिंह आदि ने सवाल पूछे।
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