संत बनाम सत्ता: CM योगी के ‘मर्यादा’ वाले बयान पर शंकराचार्य का पलटवार— “खुद के 45 केस हटवा लिए, क्या यही कानून का राज है?”

REGIONAL

लखनऊ/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच जुबानी जंग ने राज्य के राजनीतिक और धार्मिक हलकों में तूफान खड़ा कर दिया है। माघ मेले में हुए विवाद को लेकर सीएम योगी के बयान पर पलटवार करते हुए शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री की ‘कानून के शासन’ वाली दलील पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

योगी का प्रहार: “हर कोई नहीं बन सकता शंकराचार्य”

विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना नाम लिए शंकराचार्य पर निशाना साधते हुए कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और अत्यंत पवित्र है। उन्होंने कहा, “हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। जो पात्र होगा, विद्वत परिषद जिसे मान्य करेगी, वही इस पद पर बैठेगा।”

सीएम ने माघ मेले की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि 4.5 करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच कोई भी कानून से ऊपर नहीं हो सकता और भगदड़ की स्थिति पैदा करना किसी मर्यादित व्यक्ति का आचरण नहीं है।

​शंकराचार्य का तीखा पलटवार: “कोर्ट में मुकदमों का सामना करें सीएम”

मुख्यमंत्री के इस बयान पर शनिवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि वे कानून का पालन करने वाले हैं, लेकिन मुख्यमंत्री बनते ही उन्होंने अपने ऊपर दर्ज 40-45 मुकदमे हटवा लिए। यह कहां लिखा है कि बड़े पद पर पहुंचते ही केस खत्म हो जाएंगे? अगर आप वाकई कानून को मानते हैं तो कोर्ट में उन मामलों का सामना करिए।”

सपा ने शेयर किया ‘गोरखनाथ मंदिर’ का पुराना पोस्ट

इस विवाद में समाजवादी पार्टी भी कूद पड़ी है। अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के एक सोशल मीडिया पोस्ट को रीपोस्ट किया, जिसमें गोरखनाथ मंदिर के एक पुराने पोस्ट का स्क्रीनशॉट है। इस पुराने पोस्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ‘शंकराचार्य’ कहकर संबोधित किया गया था। सपा ने पूछा है कि अगर वे शंकराचार्य नहीं हैं, तो मंदिर के पेज से उन्हें यह सम्मान क्यों दिया गया था?

Dr. Bhanu Pratap Singh