हाल ही में आरएसएस कार्यकर्ताओं द्वारा घर–घर भारत माता की तस्वीरें और पंपलेट बांटे जा रहे हैं। इन चित्रों में भारत माता के हाथ में भगवा ध्वज दर्शाया गया है, जबकि राष्ट्रीय ध्वज के रूप में तिरंगा होना चाहिए। इसको लेकर कई लोगों में सवाल और नाराजगी पैदा हो रही है।
मेरा मानना है कि भारत माता के हाथ में तिरंगा ध्वज ही होना चाहिए, क्योंकि यह हमारे राष्ट्र की पहचान है। भगवा ध्वज हिंदू परंपरा का प्रतीक है और मैं स्वयं एक हिंदू परिवार में जन्मा हूं, पूजा–पाठ करता हूं, और हिंदू धर्मग्रंथों—रामायण, गीता, भागवत आदि—के बारे में गहन जानकारी रखता हूं। हिंदू होने के नाते मैं भगवा ध्वज का विरोधी नहीं हूं, लेकिन भारत माता के संदर्भ में तिरंगे के स्थान पर किसी अन्य ध्वज का उपयोग उचित नहीं लगता।
यदि किसी भी संगठन को यह अधिकार मिल जाए कि वह भारत माता के हाथ में अपनी पसंद का धार्मिक या संगठनात्मक ध्वज दिखाए, तो इससे राष्ट्रीय प्रतीकों की मर्यादा भंग होगी और समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।
मेरी आपत्ति किसी धर्म या आस्था के प्रति नहीं है, बल्कि इस बात पर है कि भारत माता की छवि में तिरंगे की जगह दूसरे ध्वज को दिखाना उचित नहीं है। यह राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा के विरुद्ध है, और ऐसी प्रवृत्तियों पर रोक लगनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर मैं इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने पर भी विचार करने को बाध्य हो सकता हूं।
लेखक- रमा शंकर शर्मा एडवोकेट
- मेरठ के चर्चित ‘नीला ड्रम’ हत्याकांड में मुस्कान और साहिल दोषी करार, 14 अक्टूबर को सुनाई जाएगी सजा - September 30, 2026
- आगरा नगर निगम में आउटसोर्सिंग सफाई मित्रों को मिले ईएसआई कार्ड: नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने बांटे कार्ड, संघ ने की समय पर दस्तावेज जमा करने की अपील - September 30, 2026
- आगरा में मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज ससंघ ने किया ताजमहल का दीदार: वास्तुशिल्प की सराहना की, जैन समाज ने किया स्वागत - September 30, 2026