संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों से गूंजा समापन समारोह
वाराणसी: संत अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल, कोइराजपुर हरहुआ, वाराणसी में आयोजित रामायण कॉन्क्लेव–2025 का भव्य समापन समारोह 8 नवंबर को अत्यंत दिव्यता और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। चार दिवसीय इस महाआयोजन ने न केवल मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को प्रतिष्ठित किया, बल्कि समाज में संस्कृति, संस्कार और मानवता के मूल्यों को पुनर्जीवित करने का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अजीत कुमार चतुर्वेदी (कुलपति, काशी हिंदू विश्वविद्यालय) ने अपने संबोधन में कहा कि “रामायण हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। नवाचार तभी सार्थक होता है जब वह परंपरा से जुड़ा रहे।”
विशिष्ट अतिथि श्री राधा कृष्ण मिश्र ने कहा कि रामचरितमानस का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना युगों पहले था — समाज को सार्थक दिशा देने की आवश्यकता आज भी बनी हुई है।
सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक श्री कवींद्र प्रताप सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि “संस्कार और मानवीय मूल्य ही शिक्षा की वास्तविक आधारशिला हैं। संस्कारहीन शिक्षा समाज को अंधकार की ओर ले जाती है।”
समापन दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र पर आधारित नाट्य मंचन ने सभागार को भावनाओं से भर दिया। संयोगवश, यही तिथि विद्यालय के स्थापना दिवस के रूप में भी मनाई जाती है, जिससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया।
संस्था निदेशिका डॉ. वंदना सिंह ने कहा कि “रामायण धर्म, त्याग और सेवा का जीवंत पाठ है — इसे जीवन का मार्गदर्शन बनाना ही सच्ची साधना है।”
संस्थान के उपनिदेशक श्री आयुष्मान सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन जीवन के समसामयिक मूल्यों को पुनर्जीवित करते हैं।
प्रधानाचार्या डॉ. नीलम सिंह ने सभी सहभागी विद्यालयों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “राम का आदर्श हर मानव के भीतर निहित है, आवश्यकता उसे जगाने की है।”
यह आयोजन 5 से 8 नवंबर तक चला, जिसमें अंतर्विद्यालयी प्रतियोगिताओं की श्रृंखला निरंतर जारी रही। रंगायन प्रतियोगिता, राम शलाका क्विज़, फोकलोर फिएस्टा, ब्रेनटीज़र, और मल्टीवेलेंस जैसे कार्यक्रमों में वाराणसी के प्रतिष्ठित विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
निर्णायक मंडल में डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा (विभागाध्यक्ष, ललित कला विभाग), सुनील कुमार सिंह कुशवाहा (असिस्टेंट प्रोफेसर, चित्रकला संकाय, बीएचयू), प्रख्यात शेफ मुकेश सिन्हा, डॉ. अरुणिमा दुबे, भजन गायक राजन तिवारी, कथा मर्मज्ञ पं. आशीष कृष्ण शास्त्री और क्विज मास्टर निर्मला जोशी जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को और गरिमामय बना दिया।
राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश नारायण सिंह और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपने विचारों से दूसरे दिन कार्यक्रम को विशेष सार्थकता प्रदान की। तीसरे दिन आईएएस अधिकारी श्री प्रकाश चंद्र श्रीवास्तव ने रामायण के दार्शनिक और व्यावहारिक पक्षों पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती स्नेहा सिंह और श्री जितेंद्र पांडेय ने किया।
चार दिवसीय रामायण कॉन्क्लेव–2025 ने देव दीपावली के इस पावन अवसर पर वाराणसी की धरती पर धर्म, ज्ञान और संस्कृति का अद्भुत संगम रचते हुए सभी को राममय बना दिया।
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