आगरा: “हम भारत (न्यू) के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण धनराज और यमराज वाला गणराज्य बनाने के लिए संकल्पित करते हैं!” वरिष्ठ हिंदी कथाकार दीर्घ नारायन के मुख से निकले ये शब्द नागरी प्रचारिणी सभा के हॉल में गूंजे तो वहां मौजूद हर श्रोता स्तब्ध रह गया। अवसर था ‘रंगलीला’ संस्था और पत्रिका ‘कथादेश’ (नयी दिल्ली) द्वारा आयोजित ‘क़िस्सा कहानी-7’ का।
समाज का कड़वा सच बयां करती कहानी
पूर्णिया (बिहार) के वरिष्ठ कथाकार दीर्घ नारायन ने अपनी कहानी ‘भारत (न्यू) लोग’ का पाठ करते हुए वर्तमान दौर की विद्रूपताओं पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और समाज में धनी वर्ग के बढ़ते वर्चस्व को आधार बनाकर जो सवाल उठाए, उन्होंने साहित्य प्रेमियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। एसिड हमलों की शिकार महिलाओं के संगठन ‘शीरोज़’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में कहानी का सामाजिक यथार्थ इतना गहरा था कि उपस्थित विद्वान भी इसकी गंभीरता को महसूस कर रहे थे।
साहित्यकारों ने की कहानी की समीक्षा
मुख्य वक्ता प्रो. ज्योत्स्ना रघुवंशी ने कहा कि यह कहानी चौंकाने के बजाय पाठक को निस्तेज और जड़ कर देती है। उन्होंने कहा, “यह कहानी समाज की कड़वी सच्चाई है, इसे पढ़ने के बाद मैं कई दिनों तक परेशान रही।” वहीं, मुख्य अतिथि डॉ. मुनीश्वर गुप्ता ने निर्भया कांड जैसे मामलों का जिक्र करते हुए न्याय प्रणाली पर सवाल उठाए।
कार्यक्रम के संयोजक वरिष्ठ कथाकार शक्ति प्रकाश ने लेखक की लेखनी की सराहना करते हुए कहा कि आगरा में कहानी की यह विधा फिर से जीवंत हो रही है। वरिष्ठ रचनाकार रमेश पंडित ने अध्यक्षता करते हुए प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ दीर्घ नारायन के साहित्यिक सफर की प्रशंसा की।
आगरा: साहित्यिक ऊर्जा का केंद्र
‘रंगलीला’ के निर्देशक और वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी अनिल शुक्ल ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आगरा का गौरवशाली साहित्यिक इतिहास रहा है। अमृतलाल नागर और राजेंद्र यादव जैसे दिग्गजों की जन्मभूमि होने के बावजूद, बीती सदी के उत्तरार्ध में यहाँ कहानी की धारा कुछ सूखी सी प्रतीत होने लगी थी। ‘क़िस्सा कहानी’ कार्यक्रम का मुख्य ध्येय इसी सूखी हुई नदी को फिर से साहित्यिक ऊर्जा से ‘लालमगन’ करना है।
गरिमामयी रही उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन प्रो. नसरीन बेगम ने बेहद प्रभावी ढंग से किया। अतिथियों का स्वागत अर्जुन सवेदिया, डॉ. महेश धाकड़, राम भरत उपाध्याय, शंकर देव तिवारी और अर्निका माहेश्वरी ने किया। कार्यक्रम के अंत में श्रोताओं ने लेखक से अपनी जिज्ञासापूर्ण शंकाओं का समाधान किया।
इस दौरान रामनाथ, डॉ. पीएस कुशवाह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, प्रो. सुषमा सिंह, प्रो. आभा चतुर्वेदी, शलभ भारती, भावना रघुवंशी समेत शहर के अनेक साहित्यकार, शिक्षक और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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