उत्तर प्रदेश सरकार का यह बजट कुल मिलाकर ग़रीबों, किसानों और इन्फ़्रस्ट्रक्चर को समर्पित है। धार्मिक एवं आध्यात्मिक को पर्यटन का केंद्र मानकर वाराणसी, अयोध्या, गोरखपुर को संवारने के लिये बजट में पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया गया है। निश्चित रूप से इनका विकास वैटिकन सिटी और मक्का मदीना से कमतर नहीं होना। चाहिये सरकार बधाई की पात्र है। विकास को गति देने के लिए बजट अच्छा है। स्टार्टअप के लिये १०० करोड़ रुपये का प्रावधान है जो काफ़ी तो नहीं लेकिन कोविड के कारण सरकार की आय भी सीमित है। अर्थव्यवस्था की रीढ़ उद्योगों के लिये कोई विशेष बजट आवंटित नहीं है। ODOP योजना के लिए पूरे प्रदेश के ७५ ज़िलों के लिये २५० करोड़ नाकाफ़ी हैं। इस अद्भुत योजना को साकार करने में कठिनाई आ सकती है। पीपीपी मॉडल पर विकास की बड़ी सम्भावनाएँ हैं। सरकार को पर्यटन विकास के लिए विकल्प तलाशने होंगे। इन्फ़्रास्ट्रक्चर पर ग़रीब घर पर बजट आवंटन से विकास को गति मिलेगी। जेवर व अयोध्या हवाई अड्डा निश्चित विकास को गति देंगे, लेकिन आगरा जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन को नकारना महँगा पड़ सकता है। आवश्यकता थी बजट में ब्रज एवं आगरा के पर्यटन पर एक बड़ी लकीर की। यमुना पर वॉटर पार्क, यमुना के उस पार वल्लभ भाई पटेल की तथा शिवाजी या गुरु गोबिंद सिंह जी की प्रतिमा, थीम पार्क की भूमि पर कृष्णा थीम पार्क की। संसाधन सरकार के पास सीमित हो सकते है लेकिन व्यस्थाएँ पीपीपी पर हो सकती हैं। अभी भी समय रहते समग्र भौगोलिक विकास पर ध्यान देना आवश्यक है। कुल मिलाकर ग़रीब किसान के लिये राहत भरा बजट है।
–पूरन डावर, अध्यक्ष, एफमेक
हमारे उत्तर प्रदेश के बजट में शिक्षा जगत को भी महत्ता दी गई है। राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में प्राथमिक शिक्षा को बच्चों का अनिवार्य अधिकार मानते हुए उसके लिए विभिन्न मदों- यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूता-मोजा, स्वेटर, मध्याह्न भोजन, समग्र शिक्षा अभियान पर लगभग 18,622 करोड़ रूपए का प्रावधान है। माध्यमिक शिक्षा हेतु सरकार द्वारा नए स्कूलों की स्थापना, अवस्थापना सुविधाओं के विकास, संस्कृत भाषा को प्रोत्साहन हेतु संस्कृत विद्यालयों के छात्रों के लिए निशुल्क छात्रावास एवं भोजन की सुविधा, बालिका सशक्तिकरण के तहत सैनिक स्कूल में बालिका छात्रावास निर्माण को बजट में शामिल किया गया है। उन्होंने भी कहा सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए बजट में प्राथमिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। हम इस बजट से बहुत अधिक प्रोत्साहित तो नहीं है पर संतुष्ट है। हमें शिक्षा के क्षेत्र में बजट के माध्यम से इससे अधिक धनराशि की अपेक्षा थी। हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आने वाले वर्ष में शिक्षा बजट में बढ़ोत्तरी की जाएगी।

–डॉ. सुशील गुप्ता, अध्यक्ष, एसोसिएशन ऑफ प्रोग्रेसिव स्कूल्स आगरा (अप्सा)
उत्तर प्रदेश के बजट में गांव, गरीब, किसान, महिला, युवा, बुजुर्ग, व्यापारी सभी का हित समाहित है। प्रदेश की भाजपा सरकार के बजट में बुनियादी संरचनाओं का विकास, एक्सप्रेस-वे-एयरपोर्ट निर्माण, चिकित्सा, शिक्षा, सिंचाई, ग्राम विकास, महिला कल्याण, पंचायती राज, ऊर्जा, कृषि, औद्योगिक विकास, पर्यटन, क्षेत्रीय विकास सहित सभी क्षेत्रों के विकास के साथ सुदृढ़ उत्तर प्रदेश का आधार निहित है। लोककल्याणकारी बजट में 33 करोड़ प्रदेशवासियों की मुस्कान का दस्तावेज है। भारत ऋषि व कृषि परम्परा का देश है, इसको ध्यान में रखते हुए संस्कृत विद्यालयों में गुरुकुल की परम्परा से लेकर गांव को डिजिटल बनाने की राह जहां बजट ने खोली है। वहीं अयोध्या, मथुरा, काशी, चित्रकूट, विध्यांचल एवं नैमिषारण्य जैसे आस्था के केन्द्रों के समग्र विकास का खाका खींचकर जनआकांक्षाओं को बजट में मूर्त रूप दिया गया है। बजट सर्वसमावेशी और सर्वस्पर्शी भी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य नित नए आयाम गढ़ रहा है। यह बजट प्रदेश की इकोनॉमी को एक ट्रिलियन डालर बनाने के दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा। ईज ऑफ लिविंग और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प के साथ प्रस्तुत बजट योगी सरकार के संकल्प से सिद्धि की यात्रा है।

–केके भारद्वाज, मीडिया संपर्क प्रमुख, ब्रजक्षेत्र, भारतीय जनता पार्टी
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