Hathras (Uttar Pradesh, India) । कुपोषण मुक्त भारत के लिये सरकार लगातार काम कर रही है ।अब हर कुपोषित बच्चे के घर पर न्यूनतम पांच वर्ग मीटर में पोषण वाटिका लगाई जाएगी जिसमें कम से कम एक एक पौधा सहजन और पपीते का रहेगा साथ ही हरी सब्जियां भी उगाई जाएंगी ताकि बच्चे को सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति हो सके। कुपोषण का एक बड़ा कारण सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे आयरन कैल्शियम विटामिन ए इत्यादि होते हैं जिनकी पूर्ति सहजन पपीता और पालक से हो जाती है । यह बातें जिला अधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार द्वारा पोषण माह के शुभारंभ के अवसर पर कहीं गयी । ज्ञातव्य है कि माह सितंबर को पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है जिसका विधिवत शुभारंभ सोमवार को कलेक्ट्रेट में किया गया ।
बैठक में उपस्थित जिला स्तरीय अधिकारियों एवं आईसीडीएस कर्मियों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चे के जन्म के बाद कुपोषण दूर करना एक कठिन कार्य है जबकि गर्भावस्था के दौरान माताओं के स्वास्थ्य की देखभाल करना आसान । यदि गर्भावस्था के दौरान माताओं की देखभाल और पोषण पर विशेष ध्यान दिया गया तो जन्म के समय बच्चे का वजन सही होगा और वह कुपोषण का शिकार नहीं होगा । उन्होंने आईसीडीएस कर्मियों का आह्वान किया कि गर्भवती के एनीमिया की जांच और प्रसव पूर्व समस्याओं का निदान पोषण माह के दौरान कर लिया जाए । खून की कमी वाली महिलाओं को आयरन की गोलियां उपलब्ध कराने हेतु मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया गया ।
जिलाधिकारी द्वारा निर्देश दिया गया कि पोषण माह के दौरान समस्त गतिविधियां कोरोना प्रोटोकॉल का ध्यान रखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटेशन, मास्क और दस्ताने का प्रयोग करते हुए आयोजित की जाएं । साथ ही जिला कार्यक्रम अधिकारी डीके सिंह को निर्देशित किया गया कि समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मास्क, सैनिटाइजर और दस्ताने की व्यवस्था कराना सुनिश्चित करें । पोषण माह का कैलेंडर जारी करते हुए जिलाधिकारी ने कहा- समुदाय आधारित गतिविधियों की सूचना प्रतिदिन पोषण अभियान- जन आंदोलन वेबसाइट पर अपलोड करना सुनिश्चित करें।
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