यरुशलम में अल-अक़्सा मस्जिद में इसराइली सुरक्षाबलों की कार्रवाई की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने निंदा की है.
शहबाज़ शरीफ़ ने ट्वीट किया है कि अल-अक़्सा मस्जिद में छापेमारी और हिंसा को बढ़ावा मानवाधिकारों और मानवीय क़ानूनों का उल्लंघन है.
उन्होंने ट्वीट में लिखा, “हम फ़लस्तीनियों के साथ एकजुटता से खड़े हैं. यह समय अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए निर्दोष फ़लस्तीनियों की ज़िंदगी की रक्षा करने और अंतर्राष्ट्रीय क़ानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर को सुरक्षित रखने का है.”
वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के पड़ोसी देश अफ़ग़ानिस्तान ने भी अल-अक़्सा मस्जिद में हुई हिंसा की निंदा की है.
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और ख़ासकर मुस्लिम समुदायों से अपील की है कि वो फ़लस्तीनियों के मानवाधिकार की रक्षा करें और इसराइली क्रूरता को रोकें.
रमज़ान के पवित्र महीने में शुक्रवार को नमाज़ के लिए फ़लस्तीनी इकट्ठा हुए थे जिस दौरान इसराइली पुलिस और उनके बीच झड़पें शुरू हो गईं.
फ़लस्तीनी अधिकारियों ने कहा है कि इस झड़प में तक़रीबन 150 फ़लस्तीनी घायल हुए हैं.
सऊदी ने बताया ‘पवित्रता पर हमला’
यरुशलम में अल-अक़्सा मस्जिद कंपाउंड में इसराइली सुरक्षाबलों के फ़लस्तीनियों पर की गई कार्रवाई की सऊदी अरब ने भी निंदा की है.
सऊदी अरब विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है जिसमें लिखा है, “नियमित हमलों की वृद्धि अल-अक़्सा मस्जिद की पवित्रता और इस्लामी राष्ट्र के दिलों पर हमला है.”
रमज़ान के पवित्र महीने में शुक्रवार को नमाज़ के लिए फ़लस्तीनी इकट्ठा हुए थे जिस दौरान इसराइली पुलिस और उनके बीच झड़पें शुरू हो गईं.
इसराइल का आरोप है कि कंपाउंड में फ़लस्तीनियों ने फ़लस्तीन और हमास के झंडों के अलावा पत्थर इकट्ठा कर रखे थे. वहीं फ़लस्तीनियों का कहना है कि उन पर नमाज़ के दौरान हमला किया गया था.
फ़लस्तीनी अधिकारियों ने कहा है कि इस झड़प में तक़रीबन 150 फ़लस्तीनी घायल हुए हैं.
जॉर्डन और यूएई ने भी की निंदा
मस्जिद में घुसकर पुलिस की कार्रवाई करने की जॉर्डन और यूएई ने भी निंदा की है.
सऊदी अरब ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वो इसराइली सुरक्षाबलों को फ़लस्तीनियों, उनकी ज़मीन और उनके पवित्र स्थलों पर लगातार हमलों के लिए उसे जवाबदेह ठहराएं.
साथ ही सऊदी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मध्य पूर्व में शांति के प्रयासों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है.
बीते साल रमज़ान महीने के दौरान ऐसी ही हिंसा हुई थी जिसके बाद हमास और इसराइल के बीच साल का सबसे लंबा संघर्ष शुरू हो गया था. 11 दिनों तक चले युद्ध के बाद मिस्र, जॉर्डन और अमेरिका की मध्यस्थता के बाद यह संघर्ष रुका था.
-एजेंसियां
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