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Agra, Uttar Pradesh, Bharat, India. जीआईसी मैदान आगरा पर 16 सितंबर 2023 को अंगदान शपथ महाशिविर है। इस संबंध में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल निरंतर बैठकें कर रहे हैं। GST कार्यालय जयपुर हाउस के सभागार में बैठक की। मरणोपरांत अंगदान का आग्रह किया।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री प्रोफ़ेसर एस पी सिंह बघेल ने कहा कि एक व्यक्ति मरणोपरांत आठ लोगों को जीवन दे सकता है। अंगदान से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता। उन्होंने आह्वान किया कि हम 16 सितम्बर को प्रातः दस बजे से लेकर दो बजे के मध्य जीआईसी मैदान पर आएं और इस मुहिम का हिस्सा बनें। ये एक ऐसा काम है जो महान ही नहीं, महानतम है।
उन्होँने कहा कि हम सब जानते हैं कि शरीर मरणोपरांत कुछ देर में ही ख़ाक में मिल जाना है। अगर वो शरीर का कोई अंग किसी के काम आ जाए या किसी का जीवन उसके किसी अंग से बच जाए तो इससे बड़ी बात क्या हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अंगदान का जो प्रमाण पत्र मिलेगा, उसे फ्रेम कराकर अपनी बैठक में लगा लें। समय समय पर अपने परिवार को ये बताते रहे हैं कि मेरे मरने के बाद शरीर दान दे दें। इससे मेरी आत्मा को अवश्य शांति मिलेगी।

कार्यक्रम में शम्भू चौबे एडिशनल कमिश्नर GST, बिजेंद्र सिंह एडवोकेट, कृष्ण मुरारी एडवोकेट, एपीएस तोमर, सभी अधिकारीगण और बार के सदस्यों के साथ दिगंबर सिंह धाकरे, नवीन गौतम, पार्षद गौरव शर्मा आदि उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि 13वें भारतीय अंगदान दिवस पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने अंगदान किया है। इसके लिए उन्हें एक प्रमाणपत्र भी जारी हुआ है। स्वयं अंगदान करने के बाद प्रो. एसपी सिंह बघेल ने लोगों से अंगदान की अपील की है।
प्रो एसपी सिंह बघेल का कहना है, वे इस बात में यकीन रखते है कि किसी भी व्यक्ति से कुछ करने के लिए कहने से पहले हमें उस कार्य को खुद में आत्मसात करना चाहिए। इसीलिए आज 13वें भारतीय अंगदान दिवस पर लोगों से अंगदान की अपील करने से पहले खुद अंग दान करने की शपथ ली।

कई सारे अंगों का दान किया जा सकता है। यह सिर्फ हृदय, लिवर और गुर्दे का दान नहीं होता। पैनक्रियाज, फेंफड़े, छोटी और बड़ी आंत, पेट, त्वचा, हड्डी, हार्ट वाल्व और टेंडन जैसे टीश्यूज को भी दान कर सकते हैं। दान किया हुआ यह अंग किसी दूसरे व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसके लिए दानदाता के शरीर से दान किए गए अंग को ऑपरेशन द्वारा निकाला जाता है। अंगदान के मामलों को राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) देखता है।
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