लखनऊ में वीरांगना रानी अवंतीबाई की 196वीं जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अर्पित किए श्रद्धासुमन: बोले- उनका बलिदान युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को देश की महान वीरांगना रानी अवंतीबाई की 196वीं जयंती के पावन अवसर पर एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि रानी अवंतीबाई मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर देने वाली देश की महानतम वीरांगनाओं में से एक थीं। उनके अद्भुत पराक्रम, अदम्य साहस और महान त्याग के प्रति हर भारतवासी हमेशा नतमस्तक रहेगा।

बदायूं में पीएसी की नई वाहिनी का गठन

​समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि राज्य सरकार ने बदायूं जिले में वीरांगना रानी अवंतीबाई के नाम पर पीएसी (PAC) की एक नई वाहिनी का गठन किया है, जिसका निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही, वहां रानी अवंतीबाई की भव्य अश्वारोही प्रतिमा की स्थापना किए जाने की प्रक्रिया भी अब अपने अंतिम चरण में है। भारत के पहले स्वाधीनता संग्राम यानी वर्ष 1857 की महान क्रांतिकारी वीरांगना अवंतीबाई की पावन जयंती पर उनकी स्मृतियों को शत-शत नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि दी।

​मात्र 27 वर्ष की आयु में दिया था सर्वोच्च बलिदान

​मुख्यमंत्री ने रानी अवंतीबाई के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज उनकी 196वीं जयंती है। वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के समय उनकी आयु मात्र 27 वर्ष थी। इतनी कम उम्र में उन्होंने देश की आजादी के संघर्ष में अपना जीवन बलिदान कर एक अनूठी मिसाल कायम की थी। उनका यह अमर बलिदान आज की युवा पीढ़ी को भी राष्ट्र के प्रति पूरी तरह समर्पित रहने की गहरी प्रेरणा देता है।

सीएम योगी ने कहा कि वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी भारत की आजादी की उन महान नायिकाओं में शुमार हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश की स्वतंत्रता के नाम कर दिया। उन्होंने देश की खातिर अपना सब कुछ न्योछावर करने में एक पल का भी संकोच नहीं किया। रानी अवंती बाई लोधी के यशस्वी नेतृत्व में अंग्रेजों के विरुद्ध देश की आजादी के लिए कड़ा संघर्ष किया गया था। आज भी देश का प्रत्येक नागरिक पूरी श्रद्धा के साथ उनकी स्मृतियों को नमन करता है और उनके अमूल्य योगदान व बलिदान के आगे सिर झुकाता है।




Dr. Bhanu Pratap Singh