आगरा। सालों से जाम, सड़क हादसों और प्रदूषण की मार झेल रहे आगरा शहर के लिए अब निर्णायक कदम उठाने की मांग तेज हो गई है। आगरा नॉर्दर्न बाईपास पूरा होकर 4 दिसंबर 2025 से चालू हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद गैर-आगरा-गंतव्य भारी वाणिज्यिक वाहन अब भी शहर के भीतर से होकर गुजर रहे हैं। इसे जन-जीवन के लिए खतरनाक बताते हुए शहर में इन वाहनों के प्रवेश पर स्थायी, बाध्यकारी और वैधानिक प्रतिबंध लगाने की मांग उठ रही है।
इस मुद्दे को लेकर आगरा के वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। मामला बुधवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन समयाभाव के कारण सुनवाई नहीं हो सकी।
वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामला
यह विषय सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चल रहे मामले रिट याचिका (सिविल) संख्या 13381/1984, एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ एवं अन्य से जुड़ा है, जिसमें आगरा में वायु प्रदूषण और भारी वाहनों की आवाजाही को गंभीर जन-स्वास्थ्य का मुद्दा माना गया है।
बाईपास बना, फिर भी शहर में क्यों घुस रहे ट्रक?
केसी जैन के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 30 दिसंबर 1996 को आगरा में प्रदूषण और भारी वाहनों को लेकर सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद 7 अगस्त 2006 को गैर-जरूरी भारी वाहनों के प्रवेश पर नियंत्रण की बात दोहराई गई।
उन्होंने बताया कि 2016 में नॉर्दर्न बाईपास की सार्वजनिक घोषणा हुई, 2019 में यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्ययोजना में गैर-आगरा-गंतव्य भारी वाहनों को प्रमुख प्रदूषण स्रोत माना गया, 25 फरवरी 2023 को निर्माण का औपचारिक शुभारंभ हुआ, और 4 दिसंबर 2025 को करीब 12.67 किमी लंबा नॉर्दर्न बाईपास यातायात के लिए खोल दिया गया। इसके बावजूद शहर के भीतर भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
हादसे, जाम और प्रदूषण की कीमत चुका रहा शहर
केसी जैन ने कहा कि बाईपास चालू होने के बाद भी भारी वाहनों का शहर से गुजरना किसी भी तर्क से उचित नहीं ठहराया जा सकता। इससे एनएच-19 समेत शहर के प्रमुख मार्गों पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं और आम लोगों की सुरक्षा खतरे में है। उन्होंने इसे केवल ट्रैफिक मैनेजमेंट नहीं, बल्कि पब्लिक सेफ्टी और पब्लिक हेल्थ का मामला बताया।
डायवर्जन नहीं, कानून से लगे रोक
केसी जैन ने स्पष्ट किया कि समस्या का समाधान अस्थायी डायवर्जन नहीं, बल्कि वैधानिक अधिसूचना से ही संभव है। उनकी मांग है कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत धारा 115 में गैर-आगरा-गंतव्य भारी वाहनों के शहर में प्रवेश पर औपचारिक रोक लगे, धारा 116 के तहत इन वाहनों को अनिवार्य रूप से नॉर्दर्न बाईपास या वैकल्पिक मार्गों से गुजारा जाए, और धारा 119 के तहत उल्लंघन पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
केसी जैन ने उम्मीद जताई कि मामला जल्द दोबारा सूचीबद्ध होगा और सुप्रीम कोर्ट नॉर्दर्न बाईपास के चालू होने को आधार बनाकर आगरा में भारी वाहनों के प्रवेश पर स्पष्ट, लागू करने योग्य और स्थायी प्रतिबंध लगाएगा।
उन्होंने कहा कि आगरा के लिए यह मुद्दा अब “विकल्प” नहीं बल्कि “जरूरत” बन चुका है, क्योंकि हर दिन की देरी शहरवासियों की जान और स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है।
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